मंदिरों में गूंजने लगे जयकारे
कोलकाता. शक्ति की आराधना के लिए विशेष महत्व रखने वाला नवरात्र रविवार से शुरू हो गया। कोलकाता समेत पूरे पश्चिम बंगाल में देवी की आराधना शुरू हो गई। फिल्म अभिनेत्री विद्या बालन ने कालीघाट मंदिर में जाकर पूजा की तथा मां काली से आशीर्वाद लिया। नवरात्र पर जहां घरों में देवी की आराधना शुरू हो गई वहीं मन्दिरों में जय माता दी के जयकारे गूंजने लगे। पण्डित मनोज बिस्सा ने बताया कि जब नवरात्र का प्रारम्भ सोमवार या रविवार से होता है तो मां दुर्गा का वाहन हाथी होता है। इस साल नवरात्र पर देवी दुर्गा हाथी पर सवार होकर आईं। इसका अर्थ है कि वे अपने साथ सुख-समृद्धि लेकर पधारी। संकेत यह भी माना जाता है कि इस साल वर्षा अधिक होने से फसलों की पैदावार अच्छी होगी तथा चारों ओर हरियाली रहेगी। वहीं माता रानी मुर्गे पर सवार होकर प्रस्थान करेंगी जो जनमानस में व्याकुलता और व्यग्रता का ***** है।
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30 साल बाद दुर्लभ संयोग
पण्डित जोशी ने बताया कि ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार इस साल शारदीय नवरात्र में 30 साल के बाद एक दुर्लभ संयोग बना है। बुधादित्य योग, शश योग और भद्र राजयोग में नवरात्र का प्रारम्भ हुआ। इस बार नवरात्र में सूर्य और बुध का संयोग बना।
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मां दुर्गा अपने मायके में
पण्डित रवि छंगाणी के अनुसार साल में चार नवरात्र आते है जिनमे दो बार गुप्त नवरात्र तथा दो चैत्र व शारदीय नवरात्रि होते हैं। चैत्र नवरात्र से हिंदू नव वर्ष की शुरुआत होती है वहीं शारदीय नवरात्र धर्म की अधर्म पर और सत्य की असत्य पर जीत का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन्हीं नौ दिनों में मां दुर्गा धरती पर आती है और धरती को उनका मायका कहा जाता है। उनके आने की खुशी में इन दिनों को दुर्गा उत्सव के तौर पर देशभर में धूमधाम से मनाया जाता है। नवरात्र के प्रथम दिन देवी उपासना के पहले कलश स्थापना की जाती है।
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ये है पौराणिक कथा
शारदीय नवरात्रि से जुड़ी दो पौराणिक कथाएं काफी प्रचलित है। पहली कथा के अनुसार महिषासुर नामक राक्षक ने ब्रह्मा को प्रसन्न कर उनसे वरदान मांगा कि दुनिया में कोई भी देव, दानव या धरती पर रहने वाला मनुष्य उसका वध न कर सके। इस वरदान को पाने के बाद महिषासुर आतंक मचाने लगा। उसके आतंक को रोकने के लिए शक्ति के रूप में मां दुर्गा प्रकट हुईं। मां दुर्गा और महिषासुर के बीच नौ दिन तक युद्ध चला और दसवें दिन मां ने महिषासुर का वध कर दिया। दूसरी कथा के अनुसार जब भगवान राम ने रावण से युद्ध के दौरान नौ दिन तक मां भगवती की आराधना की। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर मां ने उन्हें जीत का आशीर्वाद दिया। दसवें दिन राम ने रावण को हराकर लंका पर विजय प्राप्त की और तभी से विजयदशमी का त्योहार मनाया जाने लगा।