
आपूर्ति का आधा पानी रोज हो रहा है बर्बाद
पुरानी पाइपलाइनों से लीकेज और नलों से बह रहा है पानी
महानगर की बड़ी आबादी तरस रही स्वच्छ पानी के लिए
रवीन्द्र राय
कोलकाता. कोलकाता में पानी की जितनी आपूर्ति होती है उसका आधा पानी पुरानी पाइपलाइनों से लीकेज और नलों व टैप से बर्बाद हो जाता है। कोलकाता नगर निगम (केएमसी) की ओर से हाल में किए गए एक सर्वेक्षण में महानगर में पानी की बर्बादी को लेकर जो तस्वीर सामने आई है वो भयावह है। रिपोर्ट के अनुसार, केएमसी अपने तीन प्रमुख वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के माध्यम से प्रतिदिन 488 मिलियन गैलन स्वच्छ पानी की आपूर्ति करता है, इसमें से लगभग 50 फीसदी पानी बर्बाद हो जाता है। हालात ये हैं कि अब भी महानगर की एक बड़ी आबादी स्वच्छ पानी के लिए तरस रही है।
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भूजल हर साल एक फीट नीचे
एक अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित अध्ययन से पता चला है कि कोलकाता में भूजल सालाना करीब एक फीट नीचे चला जा रहा है। भूजल की अंधाधुंध निकासी के कारण महानगर के भूजल का तीन-चौथाई हिस्सा आंशिक या पूरी तरह खारा हो गया है। 1993 से 2019 तक राज्य में भू गर्भ जल का स्तर 1.3 मीटर घट गया है।
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तेज गर्मी से पानी का संकट
इस बीच तेज गर्मी से महानगर के टालीगंज, जादवपुर और ईएम बाईपास इलाके में पानी की किल्लत देखी जा रही है। जबकि राज्य के 9 जिलों के 72 प्रखंडों में जलस्तर कम होने से राज्य सरकार की चिंता बढ़ गई है। राज्य के 42 प्रखंडों में जल संकट की स्थिति गंभीर बताई जा रही है। मुर्शिदाबाद, पूर्व बर्दवान, उत्तर 24 परगना, हुगली, पश्चिम मिदनापुर के कुछ प्रंखडों तथा पूर्व मिदनापुर के भगवानपुर, सुताहाटा में जलस्तर में कमी आई है।
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ज्यादा पानी का इस्तेमाल
कोलकातावासियों की रोजाना जरूरतों को पूरा करने के लिए 250 मिलियन गैलन पानी की जरूरत है। जबकि प्रतिदिन 488 मिलियन गैलन की आपूर्ति होती है। इस प्रकार आधा पानी बर्बाद हो जाता है। महानगरवासी राष्ट्रीय खपत से ज्यादा पानी का इस्तेमाल करते हैं। दैनिक राष्ट्रीय खपत प्रति व्यक्ति 135 लीटर पानी है।
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इनका कहना है
पेयजल की बर्बादी को रोकना है। हम सभी महानगरवासियों से आग्रह करते हैं कि पानी की बर्बाद हर हाल में रोकें।
फिरहाद हकीम, मेयर, कोलकाता
Published on:
29 Apr 2022 12:19 am
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