19 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

पश्चिम बंगाल में हिन्दी विश्वविद्यालय की स्थापना

- राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने दी विधेयक को मंजूरी- हावड़ा के दासनगर में स्थापित होगा राज्य का पहला हिन्दी विश्वविद्यालय

2 min read
Google source verification
पश्चिम बंगाल में हिन्दी विश्वविद्यालय की स्थापना

पश्चिम बंगाल में हिन्दी विश्वविद्यालय की स्थापना

कोलकाता

पश्चिम बंगाल के हावड़ा में हिन्दी विश्वविद्यालय खोलने के प्रस्ताव को राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने मंजूरी दे दी। इस प्रकार राज्य में पहले हिन्दी विश्वविद्यालय केनिर्माण का रास्ता अब साफ हो गया। हिन्दी विश्वविद्यालय का निर्माण हावड़ा के दासनगर में होगा। शुक्रवार को राजभवन की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि राज्यपाल ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 200 के तहत हिंदी विश्वविद्यालय बिल पर अपनी मंजूरी दे दी। इसके साथ राज्यपाल ने ‘वेस्ट बंगाल लिफ्ट्स, एस्केलेटर और ट्रैवलर्स बिल 2019’ को भी मंजूरी दे दी है।

राज्यपाल की ओर से संकेत दिया गया है कि दोनों विधेयकों के संबंध में राज्य सरकार से मांगी गई विस्तृत जानकारी काफी समय से नहीं मिल रही थी, जिसके कारण इसको मंजूरी देने में देरी हो रही थी। हालांकि संबंधित सूचनाओं के लिए राज्यपाल कार्यालय के स्तर पर काफी परिश्रम व विचार के बाद आखिरकार राज्यपाल द्वारा सहमति प्रदान कर दी गई। इसके साथ राज्यपाल ने राज्य सरकार को भविष्य के लिए ध्यान आकर्षित करते हुए कहा है कि विधायी कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की आवश्यकता है और मांगे गए इनपुट को उम्मीद के मुताबिक व समय पर उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
6 सितम्बर 2019 को पश्चिम बंगाल विधानसभा से द हिंदी यूनिवर्सिटी, वेस्ट बंगाल बिल 2019 पारित हुआ था और इसे राज्यपाल के पास मंजूरी के लिए भेजा गया था। बिल पारित होने के मौके पर ममता ने कहा था कि यह हिंदी विश्वविद्यालय नई राह दिखाएगा और एकता व सद्भाव की मिसाल बनेगा। 6 मार्च 2019 को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हावड़ा के दासनगर थाना क्षेत्र के आरुपाड़ा में राज्य के पहले हिंदी विश्वविद्यालय का शिलान्यास भी किया था। यहां तीन एकड़ जमीन पर यह विश्वविद्यालय स्थापित होगा। उस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा था कि आसनसोल और उत्तर बंगाल में भी इस हिंदी विश्वविद्यालय की शाखाएं होंगी। राज्य में बड़ी संख्या में हिंदीभाषी रहते हैं। हिंदी विश्वविद्यालय की स्थापना से उन्हें काफी लाभ होगा। राज्यपाल की मंजूरी के बाद अब हिंदी विवि के लिए अधिगृहित की गई जमीन पर निर्माण कार्य जल्द शुरू होने की उम्मीद है।

राजभवन की ओर से शुक्रवार को जारी विज्ञप्ति में बताया गया है कि विधानसभा से पारित अन्य दो विधेयक अभी राज्यपाल के विचाराधीन है। इस पर अपेक्षित इनपुट के बाद ही मंजूरी दी जा सकती है।