
वाजपेयी की प्रथम मासिक पुण्यतिथि पर काव्यांजलि
कोलकाता. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की प्रथम मासिक पुण्यतिथि पर ओसवाल भवन में भाजपा कोलकाता उत्तर जिला के तत्वावधान में काव्यांजलि का आयोजन हुआ। मंच पर भाजपा नेता प्रभाकर तिवारी, भाजपा प्रान्तीय काव्यांजलि प्रमुख गोपाल सरकार, भाजपा कोलकाता उत्तर जिलाध्यक्ष दिनेश पाण्डे, पार्षद विजय ओझा, प्रान्तीय संगठन मंत्री सुब्रत चटर्जी, प्रान्तीय सचिव श्यामापद मंडल, आचार्य कृष्ण आर्य आदि उपस्थित थे। संचालन अरुण प्रकाश मल्लावत ने किया। इस अवसर पर कवि योगेन्द्र शुक्ल सुमन, संजय बापना सनम, रामाकांत सिन्हा, नीरव नागोरी, निकुंज नागोरी, डॉ. दुर्गाशरण मिश्र, सर्वेश राय, अर्चना पाल, संदीप द्विवेदी आदि ने वाजपेयी पर केन्द्रित कविताओं का पाठ किया। संजय मंडल, आशिष त्रिवेदी, गौरव खन्ना, भंवरलाल मूंधड़ और भागीरथ सारस्वत आदि सक्रिय रहे।
देश के 10वें प्रधानमंत्री वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर में और निधन 16 अगस्त, 2018 को हुआ था। वे पहले 16 मई से 1 जून 1996 तक, तथा फिर 19 मार्च 1998 से 22 मई 2004 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे। हिन्दी कवि, पत्रकार व एक प्रखर वक्ता वाजपेयी भारतीय जनसंघ के संस्थापकों में एक थे, और 1968 से 1973 तक अध्यक्ष भी रहे। उन्होंने लम्बे समय तक राष्ट्रधर्म और वीर अर्जुन आदि राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत अनेक पत्र-पत्रिकाओं का सम्पादन भी किया। अपना जीवन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में आजीवन अविवाहित रहने का संकल्प लेकर प्रारम्भ करने वाले वाजपेयी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार के पहले प्रधानमन्त्री थे, जिन्होंने गैर काँग्रेसी प्रधानमन्त्री पद के 5 साल बिना किसी समस्या के पूरे किए। उन्होंने 24 दलों के गठबंधन से सरकार बनाई थी जिसमें 81 मन्त्री थे।
2005 से वे राजनीति से संन्यास ले चुके थे और नई दिल्ली में 6-ए कृष्णामेनन मार्ग स्थित सरकारी आवास में रहते थे। 16 अगस्त 2018 को लम्बी बीमारी के बाद अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, दिल्ली में वाजपेयी का निधन हो गया। वे जीवन भर भारतीय राजनीति में सक्रिय रहे। उत्तर प्रदेश में आगरा जनपद के प्राचीन स्थान बटेश्वर के मूल निवासी पण्डित कृष्ण बिहारी वाजपेयी मध्य प्रदेश की ग्वालियर रियासत में अध्यापक थे। पिता कृष्ण बिहारी वाजपेयी ग्वालियर में अध्यापन कार्य तो करते ही थे इसके अतिरिक्त वे हिन्दी व ब्रज भाषा के सिद्धहस्त कवि भी थे। अटलजी की बीए की शिक्षा ग्वालियर के विक्टोरिया कालेज (वर्तमान में लक्ष्मीबाई कालेज) में हुई। छात्र जीवन से वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक बने और तभी से राष्ट्रीय स्तर की वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में भाग लेते रहे।कानपुर के डीएवी कॉलेज से राजनीति शास्त्र में एमए की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। उसके बाद उन्होंने अपने पिताजी के साथ-साथ कानपुर में ही एलएलबी की पढ़ाई भी प्रारम्भ की लेकिन उसे बीच में ही विराम देकर पूरी निष्ठा से संघ के कार्य में जुट गए। सर्वतोमुखी विकास के योगदान तथा असाधारण कार्यों के लिये 2014 दिसंबर में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
राजनीतिक जीवन----अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के साथ वाजपेयी
भारतीय जनसंघ की स्थापना करने वालों में से एक थे और 1968 से 1973 तक वह राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके थे। 1955 में उन्होंने पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा, परन्तु सफलता नहीं मिली। लेकिन हिम्मत नहीं हारी और 1957 में बलरामपुर (जिला गोण्डा, उत्तर प्रदेश) से जनसंघ के प्रत्याशी के रूप में विजयी होकर लोकसभा में पहुँचे।् 1957 से 1977 तक जनता पार्टी की स्थापना तक वे 20 वर्ष तक लगातार जनसंघ के संसदीय दल के नेता रहे। मोरारजी देसाई की सरकार में 1977 से 1979 तक विदेश मन्त्री रहे और विदेशों में भारत की छवि बनाई। 1980 में जनता पार्टी से असन्तुष्ट होकर इन्होंने जनता पार्टी छोड़ दी और भारतीय जनता पार्टी की स्थापना में मदद की। 6 अप्रैल 1980 में बनी भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष पद का दायित्व भी वाजपेयी को सौंपा गया। दो बार राज्यसभा के लिये भी निर्वाचित हुए। लोकतन्त्र के सजग प्रहरी अटल बिहारी वाजपेयी ने ् 1997 में प्रधानमन्त्री के रूप में देश की बागडोर संभाली। सन् 2004 में कार्यकाल पूरा होने से पहले भयंकर गर्मी में सम्पन्न कराये गये लोकसभा चुनावों में भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबन्धन (एनडीए) ने वाजपेयी के नेतृत्व में चुनाव लड़ा और भारत उदय (अंग्रेजी में इण्डिया शाइनिंग) का नारा दिया। इस चुनाव में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला। ऐसी स्थिति में वामपंथी दलों के समर्थन से काँग्रेस ने भारत की केन्द्रीय सरकार पर कायम होने में सफलता प्राप्त की और भाजपा विपक्ष में बैठने को मजबूर हुई।
अटल सरकार ने 11 और 13 मई 1998 को पोखरण में 5 भूमिगत परमाणु परीक्षण विस्फोट कर भारत को परमाणु शक्ति संपन्न देश घोषित कर दिया। इस कदम से उन्होंने भारत को निर्विवाद रूप से विश्व मानचित्र पर एक सुदृढ वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित कर दिया। 19 फऱवरी 1999 को सदा-ए-सरहद नाम से दिल्ली से लाहौर तक बस सेवा शुरू की गई। इस सेवा का उद्घाटन करते हुए प्रथम यात्री के रूप में वाजपेयी ने पाकिस्तान की यात्रा करके नवाज़ शरीफ से मुलाकात की और आपसी संबंधों में एक नयी शुरुआत की।
Published on:
18 Sept 2018 10:55 pm
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