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विपक्षी गठबंधन INDIA के लिए बड़ी चुनौती बनेगा सीट शेयरिंग का फार्मूला तय कर पाना

कोलकाता। 2024 के लोकसभा चुनावों का शंखनाद अभी से हो चुका है। भाजपा जहां G20 के सफल आयोजन के बाद से इसे अपनी नयी उपलब्धि मान रहा है। वहीँ विपक्षी गठबंधन इंडिया में काफी हलचल है। चर्चा थी कि समन्वय समिति की बैठक में सीट शेयरिंग को लेकर कोई सहमति बन सकती है लेकिन यह अभी तक चुनौती बना हुआ है।

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विपक्षी गठबंधन INDIA के लिए बड़ी चुनौती बनेगा सीट शेयरिंग का फार्मूला तय कर पाना

विपक्षी गठबंधन INDIA के लिए बड़ी चुनौती बनेगा सीट शेयरिंग का फार्मूला तय कर पाना

हालाँकि सीट शेयरिंग के लिए एक सूत्र यह भी सामने आ रहा है कि जिस राज्य में जो पार्टी ज्यादा मजबूत होगी वहां सीट शेयरिंग में उसे ज्यादा तरजीह दी जाएगी।

जहां तक चार राज्यों की बात है जिनमे केरल , दिल्ली ,पंजाब और पश्चिम बंगाल शामिल है वहाँ सीट शेयरिंग में बड़ी दिक्कत आने की सम्भावना है। इन राज्यों में कोई भी दल समझौता करने को उत्सुक नहीं दिख रहा है।


क्या ममता अपने साम्राज्य शेयरिंग के लिए मानेंगी ?

अगर बात करें पश्चिम बंगाल की तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी फिलहाल विदेशी दौरे पर है और ऐसा माना जा रहा है कि उनके देश लौटने के बाद ही राज्य में लोकसभा सीटों को लेकर चर्चा की जाएगी और इस मुद्दे का निपटारा हो पायेगा। हालाँकि ऐसा होना भी अभी तक टेढ़ी खीर माना जा रहा है।

राज्य में सीटों के बंटवारे को लेकर इसलिए भी कशमकश है क्योंकि यहाँ विपक्षी दलों के बीच ही त्रिकोणीय मुकाबला है। पं.बंगाल में तीन बड़े दल टीएमसी, कांग्रेस और सीपीएम भले ही कहने को विपक्षी एकता की खातिर साथ हो और एनडीए को हारने के लिए प्रतिबद्ध हो लेकिन इनके बीच की तनातनी किसी से छिपी नहीं है।


बंगाल में जो आपस में लड़ रहे, क्या वो साथ में लड़ेंगे?

2019 में कांग्रेस और वाम दल ने टीएमसी के साथ आने से इंकार कर दिया था, वहीँ अब टीएमसी भी कांग्रेस पर गठबंधन में वाम दलों को अधिक तरजीह देने का आरोप लगा रही है।

टीएमसी यह बात पहले से कहती आ रही है कि राष्ट्रीय स्तर पर भले हम सब साथ हो लेकिन राज्य में हम किसी से कोई सहमति या समझौता नहीं करेंगे।

वहीँ कांग्रेस के भी कई नेता टीएमसी पर हमलावर रहते है। अभी हाल ही में कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने ममता बनर्जी के G20 बैठक में राष्ट्रपति की तरफ से आयोजित डिनर में जाने पर सवाल उठाया था। वहीँ सीपीएम भी टीएमसी के साथ सीट शेयरिंग को लेकर कोई ख़ास उत्सुक नहीं दिख रही है।


इन सबके मद्देनजर तीनो दलों में सुलह बिठा पाना बड़ा मुश्किल माना जा रही है। हालाँकि अगर एनडीए को हराना है तो इन्ही दलों को इंडिया गठबंधन में समन्वय की मिसाल बननी होगी।