
कोलकाता. भारत में फिल्में बनाने की आजादी नहीं है। मुझे तो अक्सर ही फिल्मों के लेकर संघर्ष करना पड़ा है। भारतीय समाज की कमियां, कुसंस्कार, रीतिरिवाज, समाज व्यवस्था, न्याय व्यवस्था, भ्रष्टाचार किसी भी बात का चित्रण फिल्मों में नहीं किया जा सकता। यहां सब पर पाबंदी हैं।
कहीं कोई जाति विरोध करती है तो कहीं कोई राजनीतिक पार्टी। यहां तक क ी आप किसी भी पात्र को काल्पनिक रूप में भी नहीं दिखा सकते। यहां समाज तय करता है कि फिल्म में क्या होना चाहिए और क्या नहीं। भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में अभिव्यक्ति की कोई आजादी नहीं।
२३वें कोलकाता अंतरराष्ट्रीय फिल्मोत्सव में हिस्सा लेने आए फिल्म निर्देशक प्रकाश झा ने यह बातें रविवार को कहीं। प्रकाश झा कोलकाता फिल्मोत्सव में पहली बार विशिष्ट अतिथि के रूप में आमंत्रित किए गए हैं। झा ने कहा कि दामुल से लेकर जय गंगाजल तक का सफर संघर्षभरा रहा।
अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर कुछ भी नहीं है। बॉलीवुड की आने वाली पद्मावती फिल्म पर संजयलीला भंसाली को ऐसी ही स्ेिथतियों के कारण चरम विरोध का सामना करना पड़ रहा है।
राजनीति से प्रभावित है सेंसर बोर्ड
सेंसर बोर्ड देश की राजनीति से प्रभावित होता है। चाहे कोई भी पार्टी सत्ता में हो। सेंसर बोर्ड समय-समय पर प्रभावित होता रहा है। किसी भी तरह का विरोध होने पर तो सेंसर बोर्ड फिल्मों को ही कतर कर रख देता है। अमरीका जैसे देश में वर्तमान राष्ट्रपति पर फिल्में बन रही हैं, पर हम यहां किसी दिवंगत राष्ट्रपति पर भी फिल्में नहीं बना सकते।
कोलकाता में दिखते हैं सच्चे फिल्म प्रेमी
फिल्म निर्देशक प्रकाश झा ने कहा कि कोलकाता अद्भुत संस्कृति का शहर है। यहां फिल्म प्रेमियों का उत्साह देखते ही बनता है। फिल्मोत्सव पूरी तरह सजीव हो उठा है। लोगों की आखों में फिल्म के प्रति चमक दिखती है। कतारें लगाकर लोग फिल्म की टिकटे खरीद रहें हैं। देश के किसी दूसरे राज्य के मुकाबले यहां कला को सम्मान देने वाले ज्यादा हैं।
Published on:
13 Nov 2017 07:46 pm
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