कोलकाता

न वंदेमातरम के टुकड़े होते और न देश बंटता -शाह

वंदे मातरम को धर्म से जोड़ कर कांग्रेस के नेताओं ने अगर वंदे मातरम के टुकड़े करने की गलती नहीं की होती तो देश का विभाजन भी नहीं होता  

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न वंदेमातरम के टुकड़े होते और न देश बंटता -शाह

भाजपा अध्यक्ष ने लिया कांग्रेस को निशाने पर

कहा तुष्टीकरण के लिए कांग्रेस ने किए राष्ट्रीय गीत के टुकड़े

कोलकाता

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने देश बंटवारे का कारण राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के टुकड़े किए जाने को बताते हुए इसके लिए कांग्रेस की तुष्टीकरण की राजनीति को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को बंगाल में तृणमूल कांग्रेस का जड़ से उन्मूलन करने के लिए सोशल मीडिया ज्यादा आक्रामक होने की बात कही। मिशन बंगाल 2019 के तहत राज्य में 22 लोकसभा सीट जीतने का निर्धारित लक्ष्य प्राप्त करने के लिए अभी से सक्रिय होने का निर्देश दिया।
अपने दो दिवसीय पश्चिम बंगाल दौरे के पहले दिन अमित शाह ने बुधवार को कांग्रेस पर तीखा वार करते हुए कहा कि

देश बंटवारे के कारण पर इतिहासकारों में मतभेद है। देश विभाजन के लिए कोई खिलाफत आंदोलन को तो कोई मुस्लिम लीग की टू नेशन थ्योरी को कारण बताता है। उनका मानना है कि कांग्रेस ने तुष्टीकरण के लिए साहित्य सम्राट बंकिम चट्टोपाध्याय के लिखित गीत वंदे मातरम के टुकड़े नहीं किए होते तो देश का विभाजन नहीं होता। वे प्रथम बंकिम चट्टोपाध्याय राष्ट्रीय स्मरण व्याख्यानमाला को यहां मंगलवार को संबोधित कर रहे थे। जिसका आयोजन श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन की ओर से किया गया था। इस मौके पर उपस्थित बुद्धिजीवियों से उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक राष्ट्र के सशक्त पक्षधर बंकिम चट्टोपाध्याय का लिखा गीत वंदे मातरम आजादी की लड़ाई का पर्याय बन गया। वामपंथी और दूसरे विचारधारा के बुद्धिजीवियों ने भी इस गीत को स्वीकार किया। लेकिन 1937 में जब कांग्रेस की अंतरिम सरकार बनी तो तुष्टीकरण की राजनीति के लिए उसने वंदे मातरम को दो भागों में बांट कर इसके प्रथम दो श्लोक को राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार किया। वंदे मातरम को धर्म से जोड़ कर कांग्रेस के नेताओं ने अगर वंदे मातरम के टुकड़े करने की गलती नहीं की होती तो देश का विभाजन भी नहीं होता।
उन्होंने कहा कि वंदे मातरम किसी धर्म से संबंधित नहीं है। वर्ष 1905 में यह आजादी की लड़ाई का पर्याय बन गया। इसके कारण लाखों देश भक्त आजादी के आंदोलन से जुड़ गए। जिस किसी भी भाषा, जाति और धर्म के आंदोलनकारी फांसी पर लटकाए जाते थे तो राष्ट्र के प्रति समर्पण के लिए एक ही शब्द था और वो था वंदे मातरम। इससे पहले उन्होंने पार्टी की सांगठनिक और सोशल मीडिया सेल की बैठक में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को सोशल मीडिया पर आक्रामक होने का निर्देश दिया। साथ ही उन्होंने वर्ष २०१९ के लोकसभा चुनाव में बंगाल की 42 में से 22 लोकसभा सीट जीतने के लक्ष्य प्राप्त करने के लिए अभी से गतिविधियां तेज करने को कहा।

Published on:
28 Jun 2018 05:15 pm
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