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भारत के आर्थिक विकास रथ को सिर्फ बाहरी कारकों का जोखिम : नागेश्वरन

- बोले, स्थिति निपटने के लिए लागातार रखी जा रही है नजर

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कोलकाता. केन्द्र सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार अनंत नागेश्वरन ने भारतीय अर्थव्यवस्था के रफ्तार पकड़ने का दावा किया। साथ ही उन्होंने देश के आर्थिक विकास के रास्ते में बाहरी कारक के जोखिम होने की शंकाएं भी जताई। उन्होंने कहा कि हर दृष्टी से देश की अर्थव्यवस्था विकास के डगर पर सरपट दौर रहा है। लोगों के प्रयास और सरकार की पहल और नीतियों के कारण वित्त वर्ष 2023 में देश का वास्तविक जीडीपी 7.2 प्रतिशत तक पहुंचा है। फिर भी भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास के रास्ते में वैश्विक अर्थव्यवस्था और व्यापार में मंदी के साथ भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं और कठोर वित्तीय स्थितियां जैसे बाहरी कारक जोखिम पैदा कर सकते हैं। इस लिए इन सभी कारकों पर लगातार नजर रखी जा रही है। वे शनिवार को यहां भारत चेंबर ऑफ कॉमर्स की ओर से भारतीय विकास और समृद्धि के दशक की शुरुआत विषय पर आयोजित आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे। इसमें चेंबर के उपाध्यक्ष राजकुमार अग्रवाल, पूर्व अध्यक्ष एचएम बांगुड़, केन्द्रीय वित्तमंत्रालय के संयुक्त सचिव (टीपीएल-3) रमन चोपड़ा और कार्यक्रम की सब कमेटी के चेयरमैन ऋषि बागड़ी भी उपस्थित थे।
नागेश्वरन ने आगाह किया कि बाहरी कारक – अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित करने वाली एक वैश्विक मंदी भारतीय सामानों के निर्यात विकास को प्रभावित कर रही है, जबकि सेवा क्षेत्र का निर्यात लचीला है) और लंबे समय तक भू-राजनीतिक अनिश्चितता और कठोर वित्तीय स्थितियां जोखिम को बढ़ाती हैं।
नागेश्वरन ने कहा कि हम विश्व और राष्ट्रीय स्तर पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और यह देख रहे हैं कि क्या गलत हो सकता है और हम खुद को कैसे तैयार कर सकते हैं।
ये कारक देश की अर्थव्यवस्था को बढ़ाएंगे आगे
इस दौरान नागेश्वरन ने केन्द्र सरकार की ओर से की गई पहल और नीतियों के चलते आने वाले दिनों में देश की अर्थव्यवस्था के आगे बढ़ने में मददगार होने का दावा भी किया। उन्होंने कहा कि निवेश और उपभोक्ता खर्च, निजी क्षेत्र की अपेक्षित वृद्धि – कॉरपोरेट्स, बैंकों और सरकार के पूंजीगत व्यय को मजबूत करने के साथ, डिजिटल प्लेटफॉर्म का विस्तार कारकों के रूप में देश की आर्थिक वृद्धि के रास्ते को सुगम बनाएंगे। साथ ही पीएम गतिशक्ति, राष्ट्रीय रसद नीति, उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजनाएं जैसी सार्वजनिक पहल भी इसमें अत्यंत मददगार साबित होंगी।