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सेन ने तब मतदाता सूची से हटवाए थे…..रामू की मां जैसे 28 लाख नाम

भारत के पहले मुख्य चुनाव आयुक्त सुकुमार सेन ने कराया था स्वतंत्र भारत में पहली बार मतदान----दी थी देश को पहली चुनी सरकार-----आजादी के समय थे पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव----लोकसभा चुनाव खास रपट

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सेन ने तब मतदाता सूची से हटवाए थे.....रामू की मां जैसे 28 लाख नाम

कोलकाता/नई दिल्ली. आजादी के बाद भारत का पहला लोकसभा चुनाव 1951 में जब हुआ तब देश की 85 प्रतिशत आबादी ने स्कूल का चेहरा तक नहीं देखा था। इस मुश्किल घड़ी में भारत के पहले मुख्य चुनाव आयुक्त सुकुमार सेन ने स्वतंत्र भारत में पहली बार १९५१ में मतदान कराकर देश को पहली चुनी सरकार दी थी। सेन ने विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र वाले देश में सफलतापूर्वक चुनाव संपन्न कराकर तब मिसाल पेश की थी। इस समय महिला मतदाताओं की पहचान उनके नाम से नहीं, बल्कि पति के नाम से ही होती थी। ऐसी अनेक महिलाएं थी जो पर्दे में रहती थीं और उनकी खुद की कोई पहचान नहीं थी। जब मतदाता सूची में नाम जोड़े गए तो महिलाओं के नाम इस तरह पाए गए.......रामू की मां, इमरान की जोरू आदि। सेन ने जब इस वोटर लिस्ट को देखा तो बेहद नाराज हुए और ऐसे 28 लाख नामों को मतदाता सूची से तत्काल हटवाया।सेन के सामने दूसरी परेशानी थी अशिक्षित मतदाताओं को उनके उम्मीदवारों की जानकारी देना। यहीं से राजनीतिक दलों को चुनाव चिह्न देने का विचार सामने आया और सभी 14 राष्ट्रीय पार्टियों को चिह्न दिए गए। पहले चुनाव में कांग्रेस का सिंबल बैलों की जोड़ी और फॉरवर्ड ब्लॉक का चिह्न हाथ था। सेन के निर्देश पर पूरे देश का डेटाबेस तैयार हुआ, जिसमेंं 21 वर्ष की उम्र से ऊपर कुल मतदाता १७.६ करोड़ थे। पहली बार उम्र, ***** के आधार पर पूरे देश में वोटर्स का डेटाबेस तैयार हुआ। जिन लोगों को प्राथमिक शिक्षा हासिल नहीं थी उन्हें वोट देने के बारे में समझाना मुश्किल काम था। देश के 3 हजार से ज्यादा थिएटरों में फिल्मों के दौरान डॉक्यूमेंट्री दिखाई गई, जिसमें वोट देने का तरीका समझाया गया। हर उम्मीदवार का अलग बैलेट बॉक्स था और मतदाता बैलेट बॉक्स पर पार्टी का चिह्न देखकर मतपत्र उसमें डालता था।
---गोदरेज ने बनाए थे 16 लाख बैलेट बॉक्स

पहले लोकसभा चुनाव के लिए गोदरेज कंपनी ने विक्रोली (मुंबई) प्लांट में 16 लाख बैलेट बॉक्स तैयार किए थे और रोज 15 हजार बॉक्स बनते थे। एक व्यक्ति एक से ज्यादा वोट न दे पाए, इसलिए अमिट स्याही विकसित की गई। पहले चुनाव में अमिट स्याही की 3.८९ लाख शीशियां इस्तेमाल हुईं। सेन ने 22 साल की उम्र में ही इंडियन सिविल सर्विस ज्वॉइन की थी और आजादी के समय वे पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव थे। 21 मार्च, 1950 से 19 दिसम्बर, 1958 तक मुख्य चुनाव आयुक्त रहे सेन को उल्लेखनीय सेवाओं के लिए 1954 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। 16 जनवरी, 1900 को बंगाल के पूर्वी बद्र्धमान जिले के श्यामसुंदर के समीप गोटन में जन्मे सेन का निधन 3 मार्च 1992 को हुआ था।