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kolkata-parashnath -खून पसीना बहाएंगे शिखरजी को बचाएंगे -नारे के साथ जैन समाज ने निकाली कोलकाता में विशाल रैली

आन बान शान है गिरिराज हमारा जान है, खून पसीना बहाएंगे शिखरजी को बचाएंगे। इन नारों के साथ जैन समाज के कई हजार लोगों ने गुरुवार को महानगर के भवानीपुर से विशाल रैली निकाली। भवानीपुर जैन संघ व पूर्व भारत जैन संघ के बैनर तले निकली रैली में जैन समुदाय की महिलाएं, बच्चों व वृद्धों ने भारी संख्या में हिस्सा लिया।

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जैन समुदाय के लोगों को संबोधित करते उनके धर्मगुरु,रैली में शामिल हाजारों की तादाद में लोग अपनी मांग के समर्थन में पदयात्रा करते हुए। ,भवानीपुर जैन संघ के अध्यक्ष मितेश भाई सेठ (नंदप्रभा) व समाजसेवी जिगर रमेश दोशी

-पीएम मोदी से हस्तक्षेप करने का अनुरोध
कृष्णदास पार्थ
कोलकाता . आन बान शान है गिरिराज हमारा जान है, खून पसीना बहाएंगे शिखरजी को बचाएंगे। इन नारों के साथ जैन समाज के कई हजार लोगों ने गुरुवार को महानगर के भवानीपुर से विशाल रैली निकाली। भवानीपुर जैन संघ व पूर्व भारत जैन संघ के बैनर तले निकली रैली में जैन समुदाय की महिलाएं, बच्चों व वृद्धों ने भारी संख्या में हिस्सा लिया। भवानीपुर जैन संघ के अध्यक्ष मितेश भाई सेठ (नंदप्रभा) व समाजसेवी जिगर रमेश दोशी के नेतृत्व में निकली रैली भवानीपुर जैन मंदिर से एलनबाय रोड, पद्दोपुकुर, चक्रबेरिया रोड (एस), रमेश मित्रा रोड, सरत बोस रोड, लेंसडाउन मार्केट, चक्रबेरिया-नॉर्दन पार्क से होते हुए भगवान महावीर सरानी के रत्नात्रयी भवन पहुंचकर समाप्त हो गई।
जिगर रमेश दोशी ने बताया कि सम्मेद शिखर जी 24 तीर्थंकरों में से 20 तीर्थंकरों की मोक्ष भूमि है। हमारा यह तीर्थ स्थान है। वहां जाकर जैन समाज के लोग पूरी तपस्या में लीन हो जाते हैं। तप करते हैं। बिना चप्पल ही 27 किलोमीटर ऊंचे पहाड़ पर चढ़ते हैं। यह स्थल झारखंड में है। उपवास के दौरान हम पानी भी नहीं पीते हैं और शौच करने तक नहीं जाते हैं। इतना पवित्र मानते हैं। यह जैनियों का तीर्थ स्थान है। रैली को कामयाब बनाने में पूर्व जैन संघ के युवा संगठन के प्रेम मेहता, धर्मेश कापडिय़ा, परेश मेहता, अरपित भाई, दीपक भाई निकेश पारेख ने प्रमुख भूमिका नभाई। जैन संघ के प्रणव भाई व निकेश भाई का भी योगदान प्रमुख था।
पर्यटक आएंगे तो ड्रिंक व मांसाहारी भोजन परोसा जाएगा
मितेश भाई सेठ का कहना है कि अगर पर्यटक आएंगे तो ड्रिंक व मांसाहारी भोजन परोसा जाएगा। हमलोग जिस स्थल को इतना पवित्र मानते हैं अगर वहां यह सब उपलब्ध हो जाएगा तो हमें अपना धर्म बचाना मुश्किल हो जाएगा। हम अपने धर्म व संस्कृति को बचाने के लिए शांतिप्रिय रैली कर रहे हैं। जिससे हमारी आवाज ऊपर तक पहुंचे और हमारी आवाज को राज्य व केंद्र सरकार समझे।
कई पहाड़ है जिसे हम पवित्र मानते हैं
जैन समाज के लोगों का कहना है कि देश में ऐसे कई स्थल है जिसका अपना धार्मिक महत्व है। इसी तरह गुजरात में पालीताना में हमारे पहले तीर्थंकर ऋषभदेव भगवान का निर्वाण हुआ था। दूसरा है गिरनार। गिरनार में हमारे 22वें तीर्थंकर नेमिनाथ भगवान है। झारखंड और गुजरात में ऐसे पहाड़ है जिसे हम लोग पवित्र मानते हैं। हम लोगों की विनती है कि सरकार इसे टूरिस्ट प्लेस घोषित न करे।
...तो हमारा मंदिर ही नहीं बचेगा
जैन समाज के लोगों का कहना है कि पूरी दुनिया में हमें शांति प्रिय माना जाता है। हम लोग किसी के धर्म में हस्तक्षेप नहीं करते हैं। अगर हम अपने धर्मस्थल को बचाने को लेकर आवाज नहीं उठाएंगे तो कल, हमलोगों के मंदिर ही नहीं रहेंगे।
प्रधानमंत्री को दी जानकारी
पूर्व भारत जैन संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि पीएम नरेंद्र मोदी को भी वे अपनी मांगों से अवगत करा चुके हैं। उन्होंने आश्वासन दिया है कि उनकी पूरी बात सुनी जाएगी। इस संदर्भ में एक कमेटी बनाई जाएगी जो सारे मुद्दे को समझे और उसका हल निकाले।
विवाद अभी थमा नहीं है
केंद्र के फैसले के बाद आदिवासी समाज ने पारसनाथ को मरांग बुरु स्थल घोषित करने की मांग की है। आदिवासियों के प्रतिनिधि का कहना है कि वे जैन धर्म की आस्था का सम्मान करते हैं, लेकिन पारसनाथ पर किसी का कब्जा नहीं होने देंगे। पारसनाथ आदिवासियों का मरांग बुरु है। सरकार को इसे मरांग बुरु स्थल घोषित करना होगा। मरांग बुरु का अर्थ सबसे ऊंची चोटी। यानी सर्वोच्च देवता। आदिवासियों की मांग के बाद देश का जैन समाज कुछ डरा-डरा सा है कि कहीं उसके धर्मस्थल पर किसी अन्य का कब्जा न हो जाए।