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जूट उद्योग को मिला जीवनदान

मोदी सरकार ने जूट उद्योग को जीवनदान दिया है। देश के 8 राज्यों के किसानों और श्रमिकों को फायदा देने के लिए केंद्र सरकार ने बुधवार को बड़ा फैसला किया। सरकार ने पैकेजिंग में जूट थैलों के अनिवार्य उपयोग के नियमों को आगे बढ़ाने की मंजूरी दे दी। इससे शत-प्रतिशत खाद्यान्न जबकि 20 प्रतिशत चीनी की पैकिंग अनिवार्य रूप से जूट के थैलों में करने का रास्ता साफ हो गया है।

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जूट उद्योग को मिला जीवनदान

जूट उद्योग को मिला जीवनदान

खाद्यान्नों की 100 प्रतिशत पैकिंग जूट थैलों में अनिवार्य
पीएम मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल ने दी मंजूरी
जूट उद्योग को बल, 40 लाख किसानों को मिलेगा फायदा
कोलकाता/नई दिल्ली. मोदी सरकार ने जूट उद्योग को जीवनदान दिया है।
देश के 8 राज्यों के किसानों और श्रमिकों को फायदा देने के लिए केंद्र सरकार ने बुधवार को बड़ा फैसला किया। सरकार ने पैकेजिंग में जूट थैलों के अनिवार्य उपयोग के नियमों को आगे बढ़ाने की मंजूरी दे दी। इससे शत-प्रतिशत खाद्यान्न जबकि 20 प्रतिशत चीनी की पैकिंग अनिवार्य रूप से जूट के थैलों में करने का रास्ता साफ हो गया है। पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक में यह फैसला हुआ। सरकारी सूत्रों के मुताबिक जूट वर्ष 2022-23 (एक जुलाई, 2022 से 30 जून, 2023) के लिए पैकेजिंग में जूट के अनिवार्य इस्तेमाल के आरक्षण संबंधी नियमों को मंजूरी दी गई। इससे जूट उद्योग को काफी बल मिलने की संभावना है। जूट मिलों, 40 लाख से ज्यादा जूट किसानों और अन्य संबद्ध इकाइयों में कार्यरत 3.7 लाख मजदूरों को फायदा होगा।
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जुड़े हैं देश के 8 राज्य
जूट के कारोबार से पूर्व, पूर्वोत्तर और दक्षिण पूर्व भारत के करीब 8 राज्य जुड़े हुए हैं। पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा, असम, त्रिपुरा, मेघालय के लिए महत्वपूर्ण है। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के लिए भी यह काफी महत्व रखता है। यह कारोबार मुख्यत: सरकार के पैकेजिंग में जूट के अनिवार्य इस्तेमाल के नियमों के चलते फल फूल रहा है। इस कारोबार में सरकारी खरीद 90 प्रतिशत से अधिक है।
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9,000 करोड़ के जूट बोरे की खरीद
जूट उद्योग को सहायता देने में सरकार सबसे बड़ी भागीदार है। सरकार खाद्यान्नों की पैकिंग के लिए हर साल लगभग 8,000-9,000 करोड़ रुपये मूल्य के जूट के बोरे खरीदती है। इससे जूट किसानों और कामगारों को उनकी उपज के लिए गारंटीशुदा बाजार सुनिश्चित होता है। जूट उद्योग के कुल उत्पादन का 75 प्रतिशत जूट के बोरे (सैकिंग बैग) हैं, जिसमें से 85 प्रतिशत की आपूर्ति भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) और राज्य खरीद एजेंसियों (एसपीए) को की जाती है।
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पर्यावरण सुरक्षा में भी मदद
सरकार का मानना है कि जूट एक प्राकृतिक, बायोडिग्रेडेबल, नवीकरणीय और पुन: उपयोग वाला फाइबर है। सभी स्थिरता मानकों को पूरा करता है। इसलिए सरकार इसके उपयोग को बढ़ावा देती है। इससे पर्यावरण सुरक्षा में भी मदद मिलेगी। जूट पैकेजिंग सामग्री (जेपीएम) अधिनियम के तहत आरक्षण नियम जूट क्षेत्र लाखों लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध कराता है। जेपीएम अधिनियम, 1987 जूट किसानों, कामगारों और जूट सामान के उत्पादन में लगे व्यक्तियों के हितों की रक्षा करता है।