
कोलकाता: हाथ रिक्शा सिटी ऑफ ज्वाय के लिए कलंक
कोलकाता/दिल्ली
हाथ रिक्शा (Hand pulled rickshaw) को ‘सिटी ऑफ ज्वाय’ के नाम से मशहूर कोलकाता (Kolkata) के कलंक करार देते हुए झारखंड से राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार ने अमानवीय प्रथा को समाप्त करने की मांग की है। पोद्दार ने राज्यसभा में गुरुवार को शून्यकाल के तहत यह मामला उठाया। उन्होंने कहा सरकार को सभी हाथ रिक्शा चालकों को ई-रिक्शा प्रदान करना चाहिए। सरकार को 100 प्रतिशत या न्यूनतम 90 प्रतिशत सब्सिडी पर ई-रिक्शा उपलब्ध कराने का सुझाव दिया है।
पोद्दार ने सदन में कहा कि सिटी ऑफ ज्वॉय यानि आनन्द की नगरी कोलकाता में ऐसी परिवहन व्यवस्था मौजूद है, जिसमें एक व्यक्ति को आनन्द देने के लिए दूसरा व्यक्ति खुद को रिक्शे में जोतता है। भद्र और सभ्य लोगों के पश्चिम बंगाल में बर्बरता और असभ्यता का यह प्रतीक आजादी के 72 वर्षों बाद भी मौजूद है। इन 72 वर्षों में हाथ रिक्शा खींचनेवालों को उनलोगों ने आजाद करने की कोशिश नहीं की जो देश को आजाद कराने का श्रेय लेते हैं। उन लोगों ने भी शोषण की यह परिपाटी खत्म नहीं की जो सर्वहारा वर्ग के शोषण के खिलाफ संघर्ष का दावा करते हैं। तृणमूल कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि उन्होंने कहा कि खुद का मां, माटी और मानुष की राजनीति का स्वांग करने वाली सरकार ने भी इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया। अब अन्त्योदय के सिद्धांत को माननेवालों की सरकार इसे खत्म करे। पोद्दार ने कहा कि सरकारी आंकड़े के अनुसार कोलकाता में हाथ से रिक्शा खींचनेवालों की संख्या करीब 6000 है। कोलकाता नगर निगम ने 2005 से हस्त चालित रिक्शों के नए लाइसेंस निर्गत करने और पुराने लाइसेंसों के नवीकरण की प्रक्रिया पर रोक लगा दी है।
Published on:
05 Jul 2019 09:51 pm
बड़ी खबरें
View Allकोलकाता
पश्चिम बंगाल
ट्रेंडिंग
