
सरकार कर्तव्य निभाने में विफल रहती है तो संविधान करेगा काम: राज्यपाल,
राज्य के राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस ने कहा कि पंचायत चुनाव के दौरान भी हिंसा की कई घटनाएं हुई हैं, इस चुनाव के दौरान भी हिंसा, हत्या, धमकी की घटनाएं हुई हैं। सबसे बुरी बात यह है कि जब लोग अपनी शिकायत बताने के लिए राज्यपाल से मिलने आए तो उन्हें रोका गया। लेकिन यह हत्या जैसी सच्चाई है जो एक दिन सामने आ ही जाएगी, मैं लोगों का राज्यपाल बनना चाहता हूं, इसलिए मैं उनसे मिलने गया, मैंने उनके साथ समय बिताया। महानगर के बड़ाबाजार स्थित माहेश्वरी भवन में हिंसा पीडि़तों से मुलाकात के बाद वे मीडिया से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मैंने जो सुना वह उन निर्दोष लोगों की गहरी आवाज थी जो गुंडों के बंदूक की नोक पर थे। सरकार को अपना कर्तव्य निभाना है, अगर सरकार अपना कर्तव्य निभाने में विफल रहती है तो संविधान अपना काम करेगा। बोस ने कहा कि मैंने पीडि़तों की बात सुनी। राज्यपाल होने के नाते मैं निष्पक्ष रहना चाहूंगा। मैंने इस मामले में सरकार से रिपोर्ट भी मांगी है। सरकार का पक्ष सुनने के बाद मैं अपनी राय दूंगा।
बोस ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पत्र लिखकर पूछा कि चुनाव के बाद हुई हिंसा के कथित पीडि़तों को पुलिस ने किस आधार पर राजभवन में प्रवेश करने से रोका, जबकि उनके कार्यालय ने इसके लिए आवश्यक अनुमति जारी की थी। राज्यपाल ने यह जानने के लिए ममता बनर्जी के लिए संवैधानिक निर्देश भी जारी किया। बोस ने बड़ाबाजार स्थित माहेश्वरी भवन का भी दौरा किया और लोकसभा चुनाव के बाद राज्य में हिंसा से प्रभावित लोगों से मुलाकात की। बोस ने माहेश्वरी भवन में रह रहे करीब 150 हिंसा पीडि़तों से बातचीत की और उनकी शिकायतों का ब्यौरा लिया। भाजपा ने टीएमसी पर चुनाव बाद हिंसा के आरोप लगाए हैं, जिसका राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी ने खंडन किया है।
राज्यपाल ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि हम सभी मिलकर हिंसा के खिलाफ लड़ाई लड़ेंगे और बंगाल को हिंसा से मुक्त करेंगे। मैं नेताजी सुभाष चंद्र बोस, कवि गुरु रवीन्द्र नाथ टैगोर और स्वामी विवेकानंद के नाम शपथ लेता हूं कि मैं अंतिम क्षण तक लड़ूंगा। उन्होंने इस दौरान रवीन्द्रनाथ और कबीर की कविताओं की कुछ पंक्तिया पढ़ी। उन्होंने राजभवन में कार्यरत सभी पुलिस कर्मियों को बदलने और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को कारण बताने को कहा। उन्होंने दावा किया कि मेरे साथ है बांग्लार माटी, बांग्लार जल, वायु। बोस ने ममता बनर्जी को लिखे अपने पत्र में संवैधानिक मानदंडों का भी हवाला दिया। इसके अनुसार मुख्यमंत्रियों को राज्य के मामलों के प्रशासन व कानून के प्रस्तावों से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी निर्णयों के बारे में राज्यपालों को सूचित करना आवश्यक है।
कलकत्ता हाईकोर्ट ने शुक्रवार को आश्चर्य जताया कि क्या राज्यपाल नजरबंद हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी चुनाव बाद हिंसा के कथित पीडि़तों के साथ राज्यपाल बोस से मिलने के लिए राजभवन जा सकते हैं, अगर इसके लिए उनके कार्यालय से अनुमति हो। शुभेंदु अधिकारी और एक अन्य व्यक्ति ने अदालत का दरवाजा खटखटाते हुए दावा किया कि लिखित अनुमति के बावजूद पुलिस ने उन्हें गुरुवार को राजभवन में प्रवेश नहीं करने दिया।न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा ने निर्देश दिया कि राजभवन से अनुमति मिलने के आधार पर विपक्ष के नेता अधिकारी लोकसभा चुनाव के बाद राज्य में कथित रूप से हिंसा से प्रभावित लोगों के साथ राजभवन जा सकते हैं। न्यायाधीश ने सुनवाई के दौरान राज्य के महाधिवक्ता से सवाल किया कि क्या राज्यपाल नजरबंद हैं। उन्होंने कहा कि जब ऐसा नहीं है, तो राज्यपाल के कार्यालय से अनुमति मिलने के बावजूद इन लोगों को उनसे मिलने की अनुमति क्यों नहीं दी गई।महाधिवक्ता किशोर दत्ता ने अदालत से कहा कि याचिकाकर्ताओं द्वारा लगाए गए आरोप सत्य नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि अधिकारी के सचिव ने घटनास्थल पर पुलिस से संवाद नहीं किया।अधिकारी के वकील ने उनकी दलील का विरोध करते हुए दावा किया कि दत्ता को उनके अधिकारियों द्वारा उचित जानकारी नहीं दी गई थी। इसके बाद दत्ता ने अदालत से कहा कि राज्यपाल शुक्रवार को बड़ाबाजार में माहेश्वरी भवन गए और पीडि़तों से मिले।
Published on:
15 Jun 2024 03:29 pm
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