
बंगाल में जहां आधे से ज्यादा अल्पसंख्यक वहां से भी हारे मुस्लिम प्रत्याशी जानिए क्यों
कोलकाता. पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी के उभार वाममोर्चे के पराभाव और तृणमूल कांग्रेस की ताकत घटने का परिणाम राज्य से चुने गए मुस्लिम सांसदों की संख्या पर पड़ा है। वर्ष 2014 में जहां 42 लोकसभा सीट वाले बंगाल से जहां आठ मुस्लिम सांसद चुने गए थे। वहीं 2019 के चुनाव में मुस्लिम सांसदों की संख्या घट कर 6 हो गई है। जिनमें एक कांग्रेस और 5 तृणमूल कांग्रेस के हैं। तृणमूल कांग्रेस के 5 मुस्लिम सांसदों में तीन महिलाएं हैं। जिनमें उलूबेडिय़ा की सजदा परवीन, बशीरहाट की नुसरत जहां, आरामबाग की अपरूपा पोद्दार उर्फ आफरीन शामिल हैं। वहीं तृणमूल के बाकी दो मुस्लिम सांसद मुर्शिदाबाद जिले से चुने गए हैं। जिनमें खलीलुर रहमान जंगीपुर व अबू ताहेर खान मुर्शिदाबाद हैंं। कांग्रेस के इकलौते मुस्लिम सांसद अबु हासिम खान चौधरी हैं। जो मालदह दक्षिण की अपनी सीट बचाने में सफल रहे। वर्ष 2014 में चुनाव जीत कर संसद पहुंची कांग्रेस की मौसम नूर ने इस बार दल बदलकर तृणमूल की टिकट पर मालदह उत्तर से चुनाव लड़ा था लेकिन जीत नहीं पाई। वहीं 2014 में माकपा की टिकट पर रायगंज सीट जीतने वाले मो. सलीम को इस बार बड़ी हार का सामना करना पड़ा। पश्चिम बंगाल में मुस्लिमों की आबादी 27 फीसदी बताई जाती है। एक दर्जन सीटों पर उसके मत उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करते हैं। बताया जाता है कि रायगंज व मालदह उत्तर की आधी से ज्यादा आबादी अल्पसंख्यकों की है, इसके बावजूद इन सीटों पर मुस्लिम प्रत्याशियों का हारना ध्रुवीकरण का परिणाम बताया जा रहा है।
Published on:
24 May 2019 07:55 pm
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