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मास्टर दा सूर्य सेन को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की श्रद्धांजलि

तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो तथा पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आजादी की लड़ाई में शहीद होने वाले क्रांतिकारी मास्टर दा सूर्य सेन को उनके जन्म दिन पर श्रद्धांजलि दी है।

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मास्टर दा सूर्य सेन को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की श्रद्धांजलि

कोलकाता.
तृणणूल कांग्रेस सुप्रीमो तथा पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आजादी की लड़ाई में शहीद होने वाले क्रांतिकारी मास्टर दा सूर्य सेन को उनके जन्म दिन पर श्रद्धांजलि दी है। सोशल नेटवर्क ट्वीटर पर शुक्रवार सुबह मुख्यमंत्री ने लिखा कि आज महान क्रांतिकारी मास्टर दा सूर्य सेन की जयंती है। इस मौके पर मैं उन्हें श्रद्धांजलि दे रही हूं। उल्लेखनीय है कि अंग्रेजों ने उन्हें 12 जनवरी 1934 को मिदनापुर जेल में फांसी के तख्त पर लटका दिया था। 18 अप्रैल 1930 को सूर्यसेन के नेतृत्व में दर्जनों क्रांतिकारियों ने बांग्लादेश स्थित चटगांव के अस्त्रागार को लूटकर अंग्रेजी शासन के खात्मे की घोषणा कर दी थी। क्रांति की धधकती आग से घबराए ब्रिटिश सरकार के प्रतिनिधि भाग गए और चटगांव में कुछ दिन के लिए अंग्रेजी शासन का अंत हो गया।

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राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने दी शुभकामनाएं

कोलकाता.
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी और राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्यवासियों को होली और वसंत उत्सव के शुभ अवसर पर शुभकामनाएं दी है। एक तरफ राज्यपाल त्रिपाठी ने राजभवन की ओर से विज्ञप्ति जारी कर तथा दूसरी तरफ मुख्यमंत्री बनर्जी ने सोशल नेटवर्क ट्वीटर पर लोगों को प्रेषित की। राजभवन की विज्ञप्ति में कहा गया कि होली व वसंतोत्सव के खुशी के अवसर पर रंगों के त्योहार लोगों में भाईचारा का संदेश दे। राज्यपाल त्रिपाठी ने कहा कि रंगों के त्योहार के कई उद्देश्य हैं। सबसे प्रमुखता से, यह वसंत की शुरुआत का जश्न मनाने के लिए होता है। हमारे सदियों पुराने साहित्य में, यह एक ऐसे त्योहार के रूप में पहचाना गया, जिसमें कृषि का उत्सव, अच्छी वसंत की फसल और उपजाऊ भूमि की स्मृति में रंगों का त्यौहार मनाया जाता है। यह पवित्र उत्सव भी टूटे हुए रिश्ते को फिर से कायम करने और नवीनीकृत करने के लिए एक अवसर के रूप में चिह्नित है। मूल रूप से यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना गया है। इधर, मुख्यमंत्री ने ट्वीटर पर लिखा कि वसंतोत्सव और होली का त्योहार समाज के हर वर्ग को एक सूत्र में बांधे रखने तथा आपसी भेदभाव भुलाकर एक दूसरे को गले लगाने वाला है। होली के रंग की छटा समाज पर अनुकूल असर डाले, यही कामना है।