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30 साल पहले लगे 16 टांकों ने बनाया ममता बनर्जी को बंगाल की शेरनी

आज से 30 साल पहले SOUTH KOLKATA के HAZRA में तत्कालीन COGRESS नेता Mamata Banerjee पर जानलेवा हमला न हुआ होता उनके सिर पर 16 टांके नहीं लगे होते तो शायद आज वे Bengal की शेरनी नहीं कहलातीं।

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Mamata Banerjee : 30 साल पहले लगे 16 टांकों ने बनाया ममता बनर्जी को बंगाल की शेरनी

Mamata Banerjee : 30 साल पहले लगे 16 टांकों ने बनाया ममता बनर्जी को बंगाल की शेरनी

कोलकाता. बंगाल (Bengal) की शेरनी बोलने से जिस चरित्र का नाम ज्यादातर भारतीयों के दिमाग में आता है वो हैं ममता बनर्जी ( Mamata Banerjee )। ऐसा क्यों। कहानी लंबी है लेकिन 12 सितम्बर 2019 को कोलकाता (Kolkata) की अलीपुर अदालत ने उस कहानी को एक बार फिर ताजा कर दिया है। अदालत ने गुरुवार को 16 अगस्त 1990 के दिन ममता बनर्जी पर हुए कातिलाना हमले के मुख्य अभियुक्त लालू आलम (Lalu Alam) को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है।
दरअसल जिस दिन ममता बनर्जी पर दक्षिण कोलकाता के हाजरा में हमला हुआ उस समय वे कांग्रेस की नेता थीं। कांग्रेस की ओर से बुलाए गए बंद के मौके पर हाजरा में प्रदर्शन की तैयारी कर रही थीं। उसी समय माकपा की युवा इकाई डीवाईएफआई से जुड़े लालू आलम समेत अन्य वामपंथियों पर ममता बनर्जी व अन्य कांग्रेस के नेताओं पर हमले का आरोप लगा था। उस समय सामने आई तस्वीर में लालू आलम हाथ में लाठी लिए ममता बनर्जी पर हमला करने की तैयारी में था। हमला हुआ भी और ममता घायल भी हुईं। उनके सिर पर १६ टांके लगे और कोलकाता के अस्पताल में उन्होंने महीने भर तक जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष किया। उस समय ममता बनर्जी के साथ और मौजूदा तृणमूल कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक 16 अगस्त के बाद ममता राज्य में वामपंथियों के कुशासन, हिंसा और जुल्मों के खिलाफ विपक्ष की प्रतीक बन गईं। कांग्रेस के युवा नेताओं में वे अगली पंक्ति में आ गईं। उनके समर्थक उन्हें दीदी कहने लगे। हमले के दिन जब चारों ओर से वामपंथियों ने ममता बनर्जी को घेर रखा था उस समय भी ममता बनर्जी की दहाड़ बंद नहीं हुई थी। बहुत से कार्यकर्ताओं को उन्हेंबचाया था। ये वो दौर था जब कांग्रेस के नेता, समर्थक माकपा और वामपंथियों की हिंसा से डरे हुए रहते थे। उस समय ममता बनर्जी ने पार्टी के युवा कार्यकर्ताओं को डटे रहने सिखाया था।
इसके बाद ममता बनर्जी पर एक बार फिर 1995 में हमला हुआ था। मटियाबु्रज में उनको निशाना बनाकर फायरिंग की गई थी लेकिन निशाना चूक गया था। दोनों ही घटनाओं के बाद ममता बनर्जी वामपंथियों के खिलाफ कमर कस कर लडऩे वाली जुझारू नेता के रूप में जानी गईं।

सत्ता बदलने के बाद आलम ने मांगी थी माफी
वर्ष 2011 में राज्य की सत्ता पर 34 साल से काबिज वामपंथी बेदखल हो गए थे। राज्य की सत्ता कांग्रेस छोडक़र तृणमूल कांग्रेस बनाने वाली ममता बनर्जी के हाथ में थी। उस समय उनपर 1990 में हुए हमले के मुख्य अभियुक्त लालू आलम ने ममता बनर्जी से माफ करने की गुहार लगाई थी। उसने कहा था कि उस समय उसे अच्छे बुरे का ज्ञान नहीं था। जो पार्टी कहती थी वही करना होता था। वह ममता बनर्जी के पैरों में गिरकर माफी मांगने को तैयार है। राज्य का विकास ममता बनर्जी की कर सकती हैं।

1984 में बन चुकी थीं जाइंट किलर
ममता बनर्जी भले ही 1990 के जानलेवा हमले में बचकर शेरनी का खिताब पाई हों लेकिन सन 1984 में ही वे जाइंट किलर बन चुकी थीं। उन्होंने 1984 में दक्षिण कोलकाता से वरिष्ठ वामपंथी नेता सोमनाथ चटर्जी को हराया था।