
लिलुआ/कोलकाता. अहंकार-अत्याचार के अंत को चरितार्थ करने वाले नृसिंह भगवान की जयंती शनिवार को बड़ा बाजार के विभिन्न इलाकों, लिलुआ पुष्करणा ब्रह्म बगीचा और बंगाल के अन्य स्थानों में परंपरागत रूप से मनाई गई। भगवान विष्णु के 10 अवतारों में शामिल रौद्र अवतार नृसिंह भगवान का प्राकट्योत्सव सिकदरपाड़ा सेकेंड लेन (अखाड़ा गली) में धूमधाम से मनाया गया। इसमें काफी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं की उपस्थिति के बीच भक्त प्रह्लाद की तपस्या, हिरणकश्यप के अभिमान और भक्तवत्सल भगवान नृसिंह के अवतरण की कथा का सजीव चित्रण किया गया। हिरणकश्यप का स्वरूप मुकेश आचार्य तथा भगवान नरसिंह का कैलाश हर्ष ने धारण किया। इस उत्सव को सफल बनाने में गिरिधारीलाल व्यास, मदनमोहनलाल व्यास, वरदमूर्ति व्यास, कृष्णमूर्ति व्यास, अनंत व्यास, रोहित आचार्य, गणेश हर्ष, टीनू कोठारी व अभिषेक हर्ष आदि ने सक्रिय भूमिका निभाई। इस मौके पर विशेष रूप से रायपुर से
आए हलधारीलाल व्यास ने महोत्सव में भगवान की आरती की। राजकुमार व्यास काकू ने बताया कि इस वर्ष महोत्सव को विजय गुप्ता को समर्पित किया गया।
उधर लिलुआ पुष्करणा ब्रह्म बगीचा में नृसिंह अवतार का सजीव चित्रण
उधर नृसिंह जयंती पर लिलुआ के पुष्करणा ब्रह्म बगीचा में शनिवार को नृसिंह अवतार का मंचन हुआ। इससे पहले फर्सिया जोशी, प्रभाष हर्ष, विकास व्यास ने हिरणकश्यप का रूप धारण किया और शिवरतन पुरोहित ने राजा का रूप धरा। ब्रह्म तेजेश्वर महादेव मंदिर में पंडित सुरेन्द्र ओझा ने मंत्रोच्चार से अभिषेक किया, जिसके बाद नृसिंह हर्ष को नृसिंह रूप धराया गया। मंदिर के बाहर बनाए गए प्रतीकात्मक खंभ को तोड़ नृसिंह अवतार का सजीव चित्रण किया गया, जिसे देखने लिलुआ सहित आसपास के क्षेत्रों से काफी संख्या में भक्त मौजूद थे। नृसिंह और हिरणकश्यप का युद्ध हुआ। त्रिकाल संध्या के समय हिरणकश्यप का वध कर भक्ति की जीत दर्शाई गई। आयोजन के संयोजक पी शीतल हर्ष ने बताया कि पिछले 8 वर्षो से यहां यह मेला हो रहा है। हावड़ा और आसपास के उपनगरों से काफी संख्या में इस आयोजन को देखने आते हैं। इस वर्ष बीकानेर से अनिल बोहरा आदि यहां मेला देखने आए थे। ग्वाल दास व्यास, जीतू पुरोहित, गोपी पुरोहित, राहुल पुरोहित, किसन पुरोहित और आर्यन हर्ष आदि का आयोजन को सफल बनाने में योगदान रहा। पंडित द्वारका प्रसाद पुरोहित ने बताया कि नृसिंह अवतार का मुख्य कारण यह था कि ब्रह्मा से मिले वरदान के बाद खुद को स्वयंभू घोषित हिरणकश्यप ने अपने पुत्र प्रह्लाद की हरि भक्ति छोड़ाने के लिए उसपर कई जुल्म किए, पर वह हरिभक्ति से विमुख न हुआ। ब्रह्मा वरदान को सच करने और अपने भक्त पर जुल्म को खत्म करने के लिए ही श्रीहरि ने नृसिंह अवतार लिया था।
Published on:
28 Apr 2018 09:30 pm
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