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विश्वासघात करने वाला महापापी: कमल मुनि

- विश्वास अपने आप में है कोहिनूर हीरा

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kolkata west bengal

विश्वासघात करने वाला महापापी: कमल मुनि

कोलकाता . किसी को विश्वास में लेकर उसके साथ किए गए वायदे से मुकर जाना, विश्वासघात करना सरासर घोर अन्याय है। आध्यात्मिक ग्रंथों में हिंसा करने वाले को पापी और विश्वासघात करने वाले को महा पापी बताया गया है। उक्त विचार संत कमल मुनि कमलेश के हैं। उन्होंने महावीर सदन में धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि किसी के साथ छल-कपट और धोखा करना, उसकी पीठ में खंजर भोंकने के समान अक्षम्य अपराध माना गया है। पशु से भी उसका जीवन गया-बीता है। पशु के ऊपर जो अपना विश्वास करता है उस विश्वास को निभाने के लिए पशु अपने प्राण तक न्योछावर कर देता है। ऐसी भावना जिस इंसान के दिल में आ जाए वह सच्चा हिंदू, मुस्लिम, जैन, बौद्ध, सिख, इसाई है। मुनि कमलेश ने कहा कि छल कपट और माया करने वाला सदियों की मैत्री पल भर में नष्ट कर देता है। अपने मित्र को भी शत्रु बना देता है। जिसका जनता में विश्वास खत्म हो गया वह जिंदा भी मुर्दे के समान जी रहा है। विश्वास दिलाया नहीं जाता है सत्य आचरण से अगले के दिलों में विश्वास स्वयं पैदा हो जाता है। परस्पर अविश्वास, अधर्म, पाप और पतन की निशानी है। अविश्वास से असुरक्षा भय और खौफ का माहौल निर्मित होता है उसके कारण मानसिक तनाव के कारण रोगों का शिकार भी हो जाता है। विश्वास अपने आप में कोहिनूर हीरा है, सबसे बड़ा धन है। साधना का राजमार्ग एवं सबसे बड़ा तप है। इसी में मोक्ष समाया हुआ है जिसको अपने आप पर विश्वास नहीं वह दूसरों में क्या विश्वास पैदा करेंगे। आज कदम-कदम पर छल कपट माया ने जाल फैलाया हुआ है। पति-पत्नी, भाई-भाई, माता-पिता पड़ोसी में परस्पर विश्वास नजर नहीं आ रहा है। इससे बड़ी हास्यास्पद बात और क्या हो सकती है। जो आध्यात्मिकता का ढोल पीट रहे हैं। विश्वास ही धर्म का राजमार्ग है जो जनता के साथ विश्वास का पालन नहीं करता अब भगवान के साथ क्या विश्वास करेगा। विश्वास का पालन करने के लिए सर्वस्व दाव पर लगा देता है देव भी उसके चरणों में नतमस्तक होते हैं।