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झारखंड में 5000 से अधिक शिक्षकों को किया सम्मानित

राज्य में शिक्षकों के लिए आयोजित राज्य के सबसे बड़े शिक्षक सम्मान समारोह में झारखंड के विभिन्न हिस्सों से आए लगभग 5000 से अधिक शिक्षकों को सम्मानित किया गया।

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झारखंड में 5000 से अधिक शिक्षकों को किया सम्मानित

11वां राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह में उपस्थित अतिथि।

रांची. झारखंड में प्राइवेट स्कूल्स एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन के तत्वावधान में 11वां राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन रविवार को रांची विश्वविद्यालय के आर्यभट्ट सभागार, मोराबादी रांची में किया गया। राज्य में शिक्षकों के लिए आयोजित राज्य के सबसे बड़े शिक्षक सम्मान समारोह में झारखंड के विभिन्न हिस्सों से आए लगभग 5000 से अधिक शिक्षकों को सम्मानित किया गया। प्राइवेट स्कूल्स एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन पासवा की ओर से आयोजित शिक्षक सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में झारखंड के विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो, राज्य के वित्त एवं खाद्य आपूर्ति मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव,रांची विश्वविद्यालय के कुलपति अजीत कुमार सिन्हा, डीएवी मैनेजिंग कमेटी के पूर्व निदेशक एलआर सैनी,पासवा के प्रदेश अध्यक्ष अध्यक्ष आलोक कुमार दूबे, राष्ट्रपति पुरस्कार अवार्ड से सम्मानित फलक फातिमा, पासवा के प्रदेश महासचिव नीरज कुमार, संजय प्रसाद, महानगर अध्यक्ष डॉ सुषमा केरकेट्टा, राशिद अंसारी, अल्ताफ अंसारी सहित पासवा के प्रदेश स्तरीय पदाधिकारी गण सम्मिलित हुए। कार्यक्रम का उद्घघाटन झारखंड विधानसभा अध्यक्ष रविंद्र नाथ महतो, झारखंड के वित्त मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव कार्यक्रम की शुरुआत विशिष्ट अतिथियों ने पूर्व राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन को श्रद्धा सुमन अर्पित कर एवम दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर झारखंड विधानसभा अध्यक्ष महतो ने आज शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षकों का सम्मान होना चाहिए। समाज जो आगे बढ़ रहा है या बढ़ता है उसमें शिक्षकों का योगदान होता है। अच्छे शिक्षकों के शिक्षा की वजह से ही बेहतर और शिक्षित समाज का निर्माण होता है।शिक्षक तो बड़े-बड़े काम किए हैं,साम्राज्य की स्थापना की है,देश का पहला साम्राज्य शिक्षक चाणक्य के कारण ही बना था। भगवान बुद्ध को भी शिक्षक कहा जाएगा। ऐसा पहल की सराहना होनी चाहिए और प्रतिवर्ष शिक्षकों को सम्मान मिलना चाहिए।

शिक्षक ही समाज को गढ़ते हैं

झारखंड के वित्त मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव ने कहा कि आज कोई भी व्यक्ति समाज के जिस पद पर भी पहुंचा है। निश्चित रूप से उसमें उन शिक्षकों का ही योगदान है जिन्होंने उन्हें गढ़ा है। अपने विद्यार्थी जीवन के संस्मरण को सुनाते हुए उन्होंने कहा कि वह खुद अपने प्राइमरी कक्षा से उच्च कक्षा तक के पढ़ाई के शिक्षकों के योगदान को नहीं भूल सकते और प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन काल में जो भी शिक्षक गण आए हैं उनका सम्मान करना चाहिए। उन्होंने शिक्षकों के कर्तव्यों को भी समझाते हुए कहा कि प्रत्येक शिक्षक की यह जिम्मेवारी है कि वह अपने कर्तव्यों का निर्वहन इस तरह से करें कि समाज के लिए आदर्श नागरिक बन सके तभी देश प्रगति कर सकता है।

छात्रों में रीडिंग हैबिट पर बल

रांची विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ अजीत सिन्हा ने छात्रों में रीडिंग हैबिट पर बल देने पर बात की। उन्होंने कहा की बदलती परिस्थिति में बच्चों को किताब से जोड़ने की आवश्यकता है। किंतु वर्तमान स्थिति में शिक्षा में मोबाइल फोन का इस्तेमाल एक बड़ी चुनौती है। इसका व्यापक असर बच्चों में हो रहा है उन्होंने कहा कि इंटरनेट से कई जानकारियां हमें मिल रही है इसका सदुपयोग भी हो रहा है लेकिन अभिभावकों को हमेशा ही बच्चों पर ध्यान देने की आवश्यकता है और बिना काम के उनके हाथों में मोबाइल नहीं दिया जाना चाहिए,सोने के वक्त कमरे से फोन को दूर रख रखना चाहिए। बच्चों को किताब पढ़ने की आदत डालनी होगी और शिक्षक इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।