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संगीत ही ईश्वर है

गीत मेरा शौक है। इसे कभी अर्जन का श्रोत नहीं बनाया। आज जो मेरी पहचान है, संगीत की वजह से ही है। मेरा मानना है कि संगीत ही ईश्वर है। यह कहना है राजस्थान के बीकानेर के मूल निवासी गायक केशव दास बिन्नानी का।

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संगीत ही ईश्वर है

संगीत ही ईश्वर है

इसे कभी अर्जन का श्रोत नहीं बनाया: केशव दास
रवीन्द्र राय
कोलकाता. संगीत मेरा शौक है। इसे कभी अर्जन का श्रोत नहीं बनाया। आज जो मेरी पहचान है, संगीत की वजह से ही है। मेरा मानना है कि संगीत ही ईश्वर है। यह कहना है राजस्थान के बीकानेर के मूल निवासी गायक केशव दास बिन्नानी का। केशव दास ने बताया कि जब मैं पांच साल का था तभी से संगीत से जुड़ गया। आज 73 साल की उम्र में भी 3 से 5 घंटे गा सकता हूं। मुख्य रूप से फिल्मी और भक्ति गीत गाता हूं।
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इस बात का खेद
बचपन से ही संगीत के दीवाने केशव दास ने स्कूल में ही अपनी पहचान बनाई। पढऩे के दौरान बिड़ला हाईस्कूल में वे प्रार्थना कराते थे। धीरे धीरे संगीत में उनकी रुचि बढ़ती गई। हालांकि उन्हें इस बात का खेद अवश्य है कि कभी संगीत की शिक्षा प्राप्त नहीं की। उनका मानना है कि यदि शिक्षा प्राप्त की होती तो आज बात कुछ और होती।
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मुकेश के साथ गाया
केशव दास ने बताया कि सदाबहार गायक मुकेश कुमार के साथ गाने का उन्हे सौभाग्य प्राप्त हुआ। जिसे वे जीवन में कभी भूल नहीं पाएंगे। उनके एक कार्यक्रम में अमीन सयानी संयोजक बने। अमीन सयानी का बोलने का अपना ही अंदाज है। उन्होंने कई बार मंच पर अपने गीतों की प्रस्तुति दी। कोलकाता के अलावा मुम्बई, चेन्नई में गाने का मौका मिला।
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कई संस्थानों से जुड़े
अपने गीतों का झरना बहाते हुए केशव दास कई संस्थानों जैसे सरगम, मधुवन, संगीत कला मंदिर, भारतीय संस्कृति संसद आदि से जुड़े। इन संस्थानों के कार्यक्रम में शिरकत की।
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समाज से मिला अवार्ड
उन्होंने बताया कि वैसे तो उन्हें कोई बड़ा अवार्ड नहीं मिला, लेकिन समाज से जो उन्हें सम्मान मिला, वो किसी अवार्ड से कम नहीं है। समाज से भरपूर प्यार मिला। आशीर्वाद मिला। एक शौकिया गायक के लिए इससे बड़ी और कोई बात नहीं हो सकती है।
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17 साल से सिखा रहे
केशव दास महानगर में 17 साल से गायकों को गीत गाने के गुर सिखा रहे हैं। उनका मानना है कि संगीत एक साधना है। कठिन रिवाज करके ही गीतों की सरिता बहाई जा सकती है। उन्होंने गायकों को भरपूर रियाज करने की सलाह दी।