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संगीत मेरे रोम रोम में बसा है: मारुति मोहता

संगीत मेरे रोम रोम में बसा हुआ है। संगीत के संस्कार विरासत में मिले हैं। यह कहना है आकाशवाणी एवं दूरदर्शन की मशहूर गायिका मारुति मोहता का। देश विदेश में अपनी आवाज का जादू बिखेरने वाली मारुति संगीत की सभी प्रमुख विधाओं - ख्याल, ठुमरी, दादरा, गीत, गजल, भजन एवं प्रांतीय लोक गायन में सहज सिद्धहस्त हैं।

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संगीत मेरे रोम रोम में बसा है: मारुति मोहता

संगीत मेरे रोम रोम में बसा है: मारुति मोहता

सभी प्रमुख विधाओं - ख्याल, ठुमरी, दादरा, गीत, गजल, भजन एवं प्रांतीय लोक गायन में सहज सिद्धहस्त
रवीन्द्र राय
संगीत मेरे रोम रोम में बसा हुआ है। संगीत के संस्कार विरासत में मिले हैं। यह कहना है आकाशवाणी एवं दूरदर्शन की मशहूर गायिका मारुति मोहता का। देश विदेश में अपनी आवाज का जादू बिखेरने वाली मारुति संगीत की सभी प्रमुख विधाओं - ख्याल, ठुमरी, दादरा, गीत, गजल, भजन एवं प्रांतीय लोक गायन में सहज सिद्धहस्त हैं। राजस्थान मूल की मारुति संघर्ष कर आगे बढ़ी है। उनके संस्कृत और हिंदी के कई आध्यात्मिक एवं राजस्थानी गीतों के एलबम लोकप्रिय हैं। छह माह की उम्र में ही अपने पिता वेणु गोपाल भराडिय़ा और माता मेमादेवी भराडिय़ा के साथ कोलकाता आ गईं। मारुति चार भाई बहनों में सबसे बड़ी है।
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देश विदेश में प्रस्तुति
बनारस घराने के प्रसिद्ध शास्त्रीय संगीत गायक पं. मोहनलाल मिश्र (अब दिवंगत) से गुरु शिष्य परम्परा के अंतर्गत संगीत शिक्षा ग्रहण करने वाली मारुति की बचपन से ही गायन में रुचि रही। राजस्थान के बड़ी खाटू की मूल निवासी मारुति ने देश-विदेश में अपनी प्रस्तुति दी है।
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सरस्वती आ रही घर में
शादी के दिनों को याद करते हुए मारुति ने बताया कि श्वसुर चम्पालाल मोहता 'अनोखा' (अब दिवंगत) ने कहा कि घर में सरस्वती आ रही है। 29 साल की उम्र में विनोद मोहता से शादी रचाई। मायके में तो सभी परिजनों ने हौसला बढ़ाया, ससुराल में भी सभी ने प्रोत्साहित ही किया।
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संतुलित पारिवारिक जीवन
बालिका विद्या भवन ,बालिका शिक्षा सदन तथा श्री शिक्षायतन की छात्रा मारुति ने बताया कि घर में हम दोनों पति पत्नी एक दूसरे का सहयोग करते हैं। पहले परिवार तथा फिर संगीत को तरजीह देती हूं। इकलौता पुत्र आर्यान्श मोहता (19) इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा है।
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रवीन्द्र भारती से एमए यादगार पल
प्रयाग संगीत समिति इलाहाबाद से संगीत प्रवीण करने वाली मारुति ने गायिका के लिए रवीन्द्र भारती विश्वविद्यालय से शास्त्रीय संगीत में प्रथम स्थान से एमए करना एवं उत्तम गुरु का सान्निध्य पाना जीवन का सबसे यादगार पल रहा। उन्होंने 1998 में स्टार प्लस की ओर से आयोजित फिलिप्स मेरी आवाज सुनो और 2000 में जी. टीवी की ओर से आयोजित सा रे गा मा प्रतियोगिता में अपने सुरीले कंठ से श्रोताओं का दिल जीत लिया था।
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मिले पुरस्कार
मारुति को प. बंग मारवाडी प्रादेशिक सम्मेलन की ओर से कला गौरव व ब्रह्म ध्यानम पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया । उनके एलबम मे।शिव स्तोत्रम पुष्पांजलि, श्री गोपाल सहस्रनाम, श्री राधा सहस्रनाम, हरिगीता, भक्ति सुधारस, शेखावाटी के गीत तथा पद्मा बिन्नानी फाउन्डेशन मुम्बई से प्रभु सुमिरण आदि प्रमुख हैं।