
राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग और राज्य बाल संरक्षण आयोग आमने-सामने
तिलजला नाबालिग हत्याकांड की जांच का मामला
कोलकाता. तिलजला नाबालिग हत्याकांड के मामले की जांच को लेकर राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग और राज्य बाल संरक्षण आयोग आमने-सामने आ गए। मृत नाबालिग के घर शुक्रवार को पहले राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो पहुंचे। थोड़ी ही देर में राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष सुदेशना रॉय भी पहुंच गईं। सुदेशना घटनास्थल से बाहर आ गईं। उन्होंने कानूनगो पर बदसलूकी का आरोप लगाया। वहीं कानूनगो ने उनपर जांच में अड़ंगा डालने का आरोप लगाया। मृत बच्ची के घर के बाद कानूनगो तिलजला थाने भी गए।
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गेट आउट बोला गया: सुदेशना
राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष सुदेशना रॉय ने आरोप लगाया कि मृत बच्ची के घर पर वे अकेली ही गई थीं। जहां राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष कानूनगो उपस्थित थे। उन्हें देखते ही कानूनगो ने उन्हें गेट आउट कहा। इसके साथ ही उन्हें ममता बनर्जी का आदमी कहते हुए बदसलूकी की गई। उन्होंने दावा किया कि इस तरह के मामलों में केंद्र और राज्य के आयोगों को भाई बहन की तरह मिलकर काम करने को कहा गया है लेकिन राष्ट्रीय आयोग का रवैया ठीक नहीं है।
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जांच में अड़ंगा डालने की कोशिश: कानूनगो
राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने कहा कि जांच प्रक्रिया को भटकाया जा रहा है। उन्हें मृतक के परिवार से बात नहीं करने दी गई। पूरे घटनाक्रम से लगता है कि जरूर कुछ छिपाने की कोशिश की जा रही है। पहले राज्य ने कहा कि राष्ट्रीय आयोग के आने की जरूरत नहीं है। जब वे आए तो राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष आ गईं और कहा कि मदद करने आई हैं। उन्हें लगता है कि पुलिस ने ठीक से काम नहीं किया और इसी वजह से बच्चे की मौत हो गई। ऐसा लग रहा है कि उन पुलिस अधिकारियों को बचाने की कोशिश की जा रही है।
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आयोग के अध्यक्ष से मारपीट, लगाया आरोप
प्रियांक कानूनगो ने तिलजला थाने में उनके साथ मारपीट का आरोप लगाया है। अध्यक्ष का आरोप है कि तिलजला थाने की पुलिस ने आयोग की टीम के साथ पीडि़ता के परिवार की बातचीत को गुपचुप तरीके से रिकॉर्ड किया। प्रियांक ने दावा किया कि जब उन्हें पता चला कि बातचीत रिकॉर्ड हो रही है तो उन्होंने पुलिसकर्मी का बॉडीकैम ले लिया। जिसके बाद पुलिसकर्मी ने उनसे मारपीट और छीनाझपटी करते हुए बॉडी कैम ले लिया। आयोग अध्यक्ष के आरोप पर अब तक कोलकाता पुलिस की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
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पुलिस कर रही थी बातचीत रिकार्ड
कानूनगो ने आरोप लगाया कि आयोग की टीम पुलिस अधिकारी विश्वक मुखर्जी के चेंबर में बैठकर पीडि़ता के परिजनों से बात कर रही थी। उसी समय वहां बॉडीकैम से रिकार्डिंग की जा रही थी। उन्होंने पुलिस अधिकारी से कैमरा लगाने का कारण और कैमरा ले लिया। चेंबर से बाहर निकलते ही पुलिस अधिकारी ने उनके साथ मारपीट की। पुलिस की वर्दी में गुंडागर्दी की। उनके हाथ से कैमरा छीन लिया गया। उनके हाथ में चोट आई। आयोग अत्याचार के खिलाफ मुंह बंद नहीं रख सकता।
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राज्य में राष्ट्रपति शासन के हालात: विकासरंजन
वरिष्ठ अधिवक्ता व माकपा नेता विकास रंजन भट्टाचार्य ने कहा कि
आयोग अध्यक्ष के साथ हुई घटना संवैधानिक संस्थाओं के प्रति राज्य सरकार की कार्यप्रणाली दर्शाती है। राज्य में कानून व्यवस्था खत्म हो गई है। राष्ट्रपति शासन लगाने की स्थिति पैदा हो गई है।
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पुलिस अधिकारियों को बचाने की कोशश: दिलीप
भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा कि आयोग के अध्यक्ष के साथ इस तरह की घटना क्षम्य नहीं है। इससे पहले भी राज्य में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, महिला आयोग की टीम के साथ भी राज्य सरकार का व्यवहार सवालों के घेरे में रहा है। बंगाल सरकार पुलिस अधिकारियों को बचाने की कोशिश कर रही है।
Published on:
01 Apr 2023 12:18 am
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