
सारा संसार शिव का स्वरूप : श्रीकांत शर्मा
कोलकाता/ रतनगढ़ . सारा संसार शिव का ही स्वरूप है। भगवान शिव ही देवाधिदेव महादेव हैं। शिव के पूजन से समस्त दोषों का शमन होता है। आरोग्य सुख के साथ-साथ सौभाग्य में भी अभिवृद्धि होती है। अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए शिव का उपवास व पूजन करें। उक्त धर्म संबोधन पिंजरापोल गौशाला में रतनगढ़ नागरिक परिषद द्वारा आयोजित श्री शिव महापुराण कथा के दौरान पूज्य गोवत्स श्रीकांत शर्मा ने दिया। उन्होंने कहा कि शिव की शरण में जाने वालों का कल्याण होता है। उन्हें शिव कभी निराश नहीं करते। भगवान भोले भाव के भूखे हैं। इस कलियुग में सत्संग में भक्ति का मार्ग ही सबसे श्रेष्ठ मार्ग है। उन्होंने प्रवचन में भगवान शिव के अनेक प्रसंगों पर प्रकाश डाला। धर्म सभा में भगवान शंकर का रुद्राभिषेक भी किया गया। रुद्राभिषेक के मुख्य यजमान समाजसेवी भरत जालान, लूणकरण सूरेका, विशंभरदयाल सराफ, प्रदीप सराफ थे। शिव कथा शुरू होने से पूर्व मुख्य यजमान हरीश भुवालका, महेश भुवालका व प्रसाद यजमान काशी प्रसाद झवर, मुरारीलाल शर्मा ने व्यासपीठ की पूजा अर्चना की। व्यासपीठ पर विराजित कथावाचक का अध्यक्ष सीताराम भुवालका, भरत जालान, वैद्य बालकृष्ण गोस्वामी, लूणकरण सूरेका, पवन पौदार, विशंभर दयाल सराफ, सुरेश केडिया, श्यामलाल चौधरी, रमेश केडिया,किशन सांखोलिया, रामरतन कन्दोई, हरिप्रकाश इंदोरिया, ओमप्रकाश मंगलहारा, सुधीर वर्मा, सुरेश मुरारका, नारायण सरावगी, विश्वनाथ चौधरी,बासुदेव सांगानेरिया, पवन माटोलिया, सुरेश स्वामी, महावीरप्रसाद सोनी, ओम सारस्वत, सज्जन चौधरी, दुर्गादत्त गोयंका ने व्यासपीठ पर विराजित कथाव्यास श्रीकांत शर्मा का पुष्प माला पहनाकर नगर की ओर से स्वागत किया। शिव कथा में राजस्थान के मंत्री व अंचल के विधायक राजकुमार रिणवा सहित नगर के हजारों धर्म श्रद्धालुओं ने रसपान कर आध्यात्मिक लाभ उठाया। मंच का संचालन पत्रकार प्रकाश चंडालिया ने किया।
'गुरु व गोविंद का आदर जरूरीÓ
कोलकाता . पश्चिम बंग प्रादेशिक मारवाड़ी सम्मेलन व लायंस क्लब ऑफ कांकुडग़ाछी की ओर से आयोजित तीन दिवसीय नानी बाई रो मायरो के दूसरे दिन यानी बुधवार को बाल व्यास कृष्ण प्रिया मांनसी ने कहा कि इस कलिकाल में यदि मनुष्य अपना कल्याण और जनम-मरण के फेरे से मुक्ति चाहता है तो उसे सच्चे हृदय से गुरु और गोविंद का आदर करना होगा। उत्तर कोलकाता के सीआईटी रोड स्थित पूर्वांचल विद्या मंदिर सभागार में आयोजित धार्मिक आयोजन में वक्ता ने कहा कि गुरु मुक्ति दे सकते हैं। ईश्वर भोग दे सकते हैं और परमात्मा मुक्ति और भोग दोनों दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि पूजा के पहले विश्वास जरूरी है। विश्वास नहीं है तो फिर पूजा व्यर्थ है। करूणा दुजारी, विश्वनाथ भुवाालका, सत्यनारीयण गुप्ता, गोपाल गुप्ता, कमल सरावगी, नंदकिशोर अग्रवाल उपस्थित थे।
Published on:
24 Oct 2018 09:08 pm
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