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नया चलन…अतिरिक्त खर्च ने बढ़ाया शादी-विवाह का बजट

शादी विवाह में होने वाला अतिरिक्त खर्च समारोह का बजट कई गुना अधिक बढ़ रहा है। एक अनुमान के तौर पर शादियों में सजावट जैसे कामों पर 15 से 20 प्रतिशत ज्यादा खर्च हो रहा है। कोलकाता पुष्करणा समाज के अध्यक्ष समाजसेवी सुशील कुमार पुरोहित ने बताया कि विवाह समारोह में नए चलन देखने में आ रहे हैं। सामान्य विवाह की तुलना में 25 प्रतिशत तक अधिक खर्च हो रहा है।

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नया चलन...अतिरिक्त खर्च ने बढ़ाया शादी-विवाह का बजट

नया चलन...अतिरिक्त खर्च ने बढ़ाया शादी-विवाह का बजट

15 से 20 प्रतिशत ज्यादा खर्च हो रहा सजावट पर
शादी समारोह का बजट कई गुना अधिक बढ़ा
शादी विवाह में होने वाला अतिरिक्त खर्च समारोह का बजट कई गुना अधिक बढ़ रहा है। एक अनुमान के तौर पर शादियों में सजावट जैसे कामों पर 15 से 20 प्रतिशत ज्यादा खर्च हो रहा है। कोलकाता पुष्करणा समाज के अध्यक्ष समाजसेवी सुशील कुमार पुरोहित ने बताया कि विवाह समारोह में नए चलन देखने में आ रहे हैं। सामान्य विवाह की तुलना में 25 प्रतिशत तक अधिक खर्च हो रहा है। फूल लाइटिंग की सजावट पर 3 से 10 लाख खर्च होते हैं। विवाह के पूरे खर्च का 20 फीसदी हिस्सा खाने पीने पर खर्च होता है।
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कोई लेखा जोखा नहीं: आयकर सलाहकार
आयकर सलाहकार देवकीनंदन बाजोरिया ने बताया कि शादियों में कई खर्च ऐसे होते हैं जिनका कोई लेखा जोखा नहीं होता। जरूरी चीजों के अलावा होने वाला यह खर्च पूरे आयोजन का लगभग 20 से 25 फीसदी होता है। काफी ऐसे खर्च हैं जिनकी आवश्यकता बहुत अधिक नहीं होती है। एक सामान्य आदमी ड्रेस कोड वाले समारोह में शामिल होने में भी हिचकता है। उन्होंने बताया कि कई ऐसे खर्च है जिनका कोई रिटर्न नहीं है। महानगरों में किसी समारोह के लिए हजार रुपए प्लेट का हिसाब बनता है जबकि गांवों में आधे से भी कम खर्च में आयोजन सफल हो जाता है।
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फूलों की सजावट के ज्यादा आर्डर
डेकोरेटिव फ्लावर समिति के सचिव अशोक दास ने बताया कि पिछले कुछ साल में फूलों की सजावट के लिए ज्यादा आर्डर मिलने लगे हैं। विवाह स्थल, दूल्हे की गाड़ी, रिसेप्शन हॉल के अलावा मायरा, हल्दी, संगीत संध्या पर भी सजावट के ऑर्डर आते हैं। इसके लिए कोई तय रेट नहीं है। लोगों का बजट और लागत देखकर काम किया जाता है और उसी आधार पर रेट तय होती है।
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विदेशों का भी रुख कर रहे लोग
कुछ लोग अब शादी समारोह के लिए विदेशों का भी रुख कर रहे हैं। कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स( कैट) ने इसे फिजूलखर्ची बताया है। कैट का कहना है कि विदेश की बजाय देश में शादी समारोह से न केवल देश के व्यापार में वृद्धि होगी बल्कि देश की बाहर जा रही मुद्रा पर अंकुश लगेगा। कैट ने व्यापारियों एवं सिविल सोसाइटी के बीच देश में ही डेस्टिनेशन वेडिंग को प्रोत्साहित करने का एक अभियान चलाया है। कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया, राष्ट्रीय वाइस चेयरमैन सुभाष अग्रवाला एवं राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि देश के लगभग 100 प्रमुख शहरों में तथा आस पास लगभग 2 हजार से अधिक ऐसे स्थान हैं जहां डेस्टिनेशन शादियां हो सकती हैं। कैट के एक मोटे अनुमान के अनुसार प्रतिवर्ष लगभग 5 हजार डेस्टिनेशन शादियां विदेशों में होती हैं जिसमें लगभग 75 हजार करोड़ से लेकर एक लाख करोड़ रुपए के खर्च का अनुमान है।