
साइलेंस जोन में शोर, उड़ाई जा रही है नियमों की धज्जियां
साइलेंस जोन में शोर। जी हां, महानगर के कॉलेज स्क्वायर व कलकत्ता मेडिकल कॉलेज के क्षेत्रों को नियम के अनुसार साइलेंस जोन घोषित किया गया हैं, पर यहां दिन-रात नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही है। बड़े अस्पतालों स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से घिरा यह इलाका एक तरह से साइलेंस नहीं, शोर जोन बन गया है। कॉलेज स्क्वायर में आए दिन किसी न किसी की सभा होती रहती है। जिसमें खुलकर लाउडस्पीकर बजाए जाते हैं। यही नहीं, बउबाजार से कलकत्ता विश्वविद्यालय के बीच दौडऩे वाले वाहन भी किसी नियम का पालन नहीं करते और तेज आवाज वाले हार्न बजाते रहते हैं। जबकि बउबाजार से मेडिकल कॉलेज अस्पताल की ओर से आने वाले चौराहे पर साइलेंस प्लीज का डिजिटल बोर्ड भी लगा है, पर वाहन चलाने वालों को इसका ध्यान ही नहीं। इसके अलावा कलकत्ता विश्वविद्यालय से सटे रास्ते पर भी साइलेंस जोन का बोर्ड लगा है।
गूंजती रहती है लाउडस्पीकर की आवाज
सिर्फ बाहरी गाडिय़ों का शोरगुल व हार्न ही नहीं, बल्कि लाउडस्पीकर की आवाज भी यहां हर दिन गूंजती रहती है। हर दिन कॉलेज स्क्वायर में जनसभा, रैली, विरोध प्रदर्शन के आयोजन होते रहते हैं। इसके अलावा कॉलेज स्क्वायर में कई क्लब भी हैं। उनका भी कुछ न कुछ आयोजन होते रहता है। ऐेसे में प्राय: हर रोज यहां लाउडस्पीकर बजते हैं।
क्या है नियम
नियमों की माने तो किसी भी अस्पताल व शिक्षण संस्थानों के आस-पास तीव्र कोलाहल मचाना ध्वनि प्रदूषण नियमों के खिलाफ है। इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट की ओर से एक ध्वनि प्रदर्शन की सीमाएं निर्धारित कर दी गई। ध्वनि प्रदूषण को रोक ने के लिए साइलेंस जोन क्षेत्रों में आवाज का स्तर 50 डेसिबल और 40 डेसिबल से अधिक नहीं हो सकता। दूसरी ओर औद्योगिक क्षेत्रों में ध्वनि का स्तर दिन में 75 डेसिबल और रात में 70 डेसिबल से अधिक नहीं हो सकता। व्यावसायिक क्षेत्रों में यह दिन में 65 डेसिबल और रात में 55 डेसिबल तय है। आवासीय क्षेत्रों में यह दिन के दौरान 55 डेसीबल और रात में 45 डेसिबल है।
साइलेंस जोन में कौन-कौन की हैं संस्थान
साइलेंस जोन में 3 विश्वविद्यालय (कलकत्ता विश्वविद्यालय, प्रेसिडेंसी विश्वविद्यालय, संस्कृत विश्वविद्यालय), 2 कॉलेज ( सेठ सूरजमल जालान कॉलेज, सिटी कॉमर्स कॉलेज), 3 स्कूल ( हिन्दू स्कूल, हेयर स्कूल, भगवती गल्र्स हाईस्कूल) और 2 अस्पताल (कलकत्ता मेडिकल कॉलेज एंड अस्पताल और उपकार नर्सिंगहोम) स्थित हंै।
इनका कहना है
हर दिन शोरगुल तो होता है। उसी में हमें कक्षाएं जारी रखनी पड़ती है। विद्यार्थियों को कहा जाता है कि अगर ज्यादा शोर हो तो खिड़कियां बंद कर दें। हमारी कोशिश होती है कि पढ़ाई पर असर न पड़े, पर हर रोज हमें इस समस्या का सामना करना पड़ता है।
- शुभ्रजीत दत्ता, प्रधानाध्यापक, हिन्दू स्कूल
कॉलेज स्क्वायर में अधिकांश आयोजन तो विपक्षी दल के विभिन्न संगठन ही करते हैं। कई बार पुलिस ने लाउडस्पीकर बंद कराया। हमारी कोशिश रहती है कि इस क्षेत्र में कम से कम शोर हो। इलाके में अस्पताल से लेकर कई शिक्षण संस्थान हैं। हम हमेशा ही ध्वनि प्रदूषण को रोक ने का हरसंभव प्रयास करते हैं।
- सपना दास, पार्षद वार्ड नं 40
Published on:
22 Jan 2019 09:11 pm
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