27 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

पंचायत चुनाव नतीजे ने इनको दिखाई आशा की किरण

राज्य के पंचायत चुनाव नतीजे ने इनको आशा की किरण दिखाई है। हाशिये पर गई पार्टी को राज्य में वापसी की उम्मीद जगी है। पंचायत चुनाव में वोट शेयर बढऩे से वाममोर्चा के कार्यकर्ता उत्साहित नजर आ रहे हैं। लोकसभा में त्रिकोणीय मुकाबले के आसार बढ़ गए हैं। एक तरफ तृणमूल कांग्रेस तो दूसरी तरफ भाजपा जोर लगाएगी, जबकि वाम, कांग्रेस और आइएसएफ गठबंधन चुनावी लड़ाई को त्रिकोणीय बनाएगा

2 min read
Google source verification
पंचायत चुनाव नतीजे ने इनको दिखाई आशा की किरण

पंचायत चुनाव नतीजे ने इनको दिखाई आशा की किरण

लोकसभा चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबले के आसार
कोलकाता. राज्य के पंचायत चुनाव नतीजे ने इनको आशा की किरण दिखाई है। हाशिये पर गई पार्टी को राज्य में वापसी की उम्मीद जगी है। पंचायत चुनाव में वोट शेयर बढऩे से वाममोर्चा के कार्यकर्ता उत्साहित नजर आ रहे हैं। लोकसभा में त्रिकोणीय मुकाबले के आसार बढ़ गए हैं। एक तरफ तृणमूल कांग्रेस तो दूसरी तरफ भाजपा जोर लगाएगी, जबकि वाम, कांग्रेस और आइएसएफ गठबंधन चुनावी लड़ाई को त्रिकोणीय बनाएगा। 2019 के लोकसभा तथा 2021 के विधानसभा चुनाव में मुकाबला दोतरफा था। वाम दल 2019 के लोकसभा चुनाव में कोई चमत्कार नहीं दिखा सके। 1977 से 2011 तक लगातार 34 साल राज्य पर शासन करने वाली लेफ्ट पार्टियां 2021 के विधानसभा चुनाव में भी कोई सीट नहीं जीत सकी। अब वाममोर्चा ने दावा किया है कि वो पश्चिम बंगाल में मजबूत हो रहा है।
--
गठबंधन का वोट शेयर बढ़ा
2021 के विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद पंचायत चुनाव में वाम मोर्चा-कांग्रेस-आइएसएफ गठबंधन ने बेहतर प्रदर्शन किया है। गठबंधन के वोट शेयर में सुधार हुआ है। गठबंधन के दावे के मुताबिक वोट प्रतिशत 2021 के 10 प्रतिशत से दोगुना से अधिक 21 प्रतिशत हो गया है। जबकि दूसरे स्थान पर उभरने के बावजूद भाजपा के वोट प्रतिशत में गिरावट आई है। 2021 में 38 प्रतिशत के मुकाबले पंचायत चुनाव में 22 प्रतिशत हो गया है। वर्ष 2018 के पंचायत चुनावों में तृणमूल कांग्रेस ने 34 प्रतिशत सीटें निर्विरोध जीती थीं।
--
कांग्रेस को ज्यादा फायदा होने की संभावना
राजनीतिक पर्यवेक्षकों के मुताबिक वाम मोर्चा-कांग्रेस-आइएसएफ गठबंधन के संयुक्त वोट शेयर प्रतिशत से यह स्पष्ट नहीं है कि वाम मोर्चे के वोट प्रतिशत में कितनी वृद्धि हुई है। पर पंचायत के तीन स्तरों में जीती गई सीटों की संख्या से तो यही लगता है कि कांग्रेस को सबसे ज्यादा फायदा हुआ है। यह लगभग तय है कि कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियां 2024 के लोकसभा चुनावों में सीट समझौता करेंगी। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि कांग्रेस को वाम मोर्चे से अधिक फायदा हो सकता है।
--
इनका कहना है
स्पष्ट संकेत हैं कि वामदल आगे बढ़ रहे हैं। 2021 के उपचुनाव के बाद लेफ्ट पार्टियां मजबूत हुई हैं। उनका मत प्रतिशत तेजी से बढ़ा है। तृणमूल कांग्रेस और भाजपा मतदाताओं को भ्रमित करने के लिए धार्मिक धु्रवीकरण कर रही हैं।
सुजन चक्रवर्ती, माकपा नेता