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Corona attack on Bengal revenue : लोग कम शराब पीने लगे तो ममता सरकार की हालत होने लगी पतली

कोरोना काल में पश्चिम बंगाल के लोगों ने शराब पीना कम कर दिया है। इस कारण राज्य की ममता बनर्जी की सरकार की हालत पतली होने लगी है। उसे हर महीने सैकड़ो करोड़ का राजस्व घाटा होने लगा है। सवाल यह कि लॉकडाउन के दौरान पहली बार शराब की दुकाने खुलने के पहले दिन करोड़ों रुपए का शराब पीने वाले बंगाल के लोगों ने क्यो शराब पीना कम कर दिया है।

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Corona attack on Bengal revenue : लोग कम शराब पीने लगे तो ममता सरकार की हालत होने लगी पतली

Corona attack on Bengal revenue : लोग कम शराब पीने लगे तो ममता सरकार की हालत होने लगी पतली

हर महीने हो रहा है 600 करोड़ रुपए का राजस्व घाटा
कोलकाता
कोरोना काल में पश्चिम बंगाल के लोगों ने शराब पीना कम कर दिया है। इस कारण राज्य की ममता बनर्जी की सरकार की हालत पतली होने लगी है। उसे हर महीने सैकड़ो करोड़ का राजस्व घाटा होने लगा है। सवाल यह कि लॉकडाउन के दौरान पहली बार शराब की दुकाने खुलने के पहले दिन करोड़ों रुपए का शराब पीने वाले बंगाल के लोगों ने क्यो शराब पीना कम कर दिया है।
कोविड-19 महामारी रोकने के लिए लागू लॉकडाउन के दौरान देश भर में लागातार 40 दिन बाद शराब की दुकाने खोलने पर सिर्फ 10 घंटे में पश्चिम बंगाल में 100 करोड़ रुपए का शराब बिकी होने का रिकॉर्ड दर्ज किया गया था। पिछले दो महीने से उसी बंगाल में शराब की बिक्री काफी घट गई है। आबकारी विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि पलॉकडाउन के दौरान जब शराब की दुकानों को खोलने की अनुमित दी गई तब शराब की बिक्री से काफी राजस्व आने का अनुमान लगाया गया था। लेकिन वास्तिवता कुछ और निकला। आबकारी विभाग शराब से जितना राजस्व आने का अनुमान लगाया था उसके आस-पास भी राजस्व नहीं मिल रहा है। पिछले दो महीने से प्रति महीने 350 करोड़ रुपए एक्सािज ट्यूटी संग्रह हो रहा है, जबकि लॉकडाउन से पहले बंगाल में प्रत्येक महीना 950 करोड़ रुपए एक्साइज ड्यूटी संग्रह होता था।
आबकारी विभाग के एक अन्य अधिकारी ने बताया कि देशी शराब के साथ ही कम दाम वाली विदेशी शराब की भी बिक्री काफी घट गई है। जो लोग कम कीमत वाली विदेशी शराब पीते थे संभवः वे और कम कीमत वाले कुछ और नशीले पदार्थों का सेवन कर रहे हैं। इसकी वजह शराब की दुकान खोलने की अनुमति देने के साथ ही राज्य सरकार ने 30 प्रतिशत शराब की कीमत बढ़ा दी थी। इस कारण लोग इस महामारी में शराब के सेवन के प्रति लोगों का रूझान घट गया है। इसके अलावा शराबों की बिक्री का एक और कारण बार के खोलने की अनुमित नहीं दिया जाना है। इस कारण शराब की बिक्री घटने के साथ ही सरकार के खजाने में शराब की बिक्री से आने वाला राजस्व भी घट गया है।
राज्य के वित्त विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि शराब की बिक्री इतनी घट गई है कि राज्य का खजाने में धन का अभाव होने लगा है। सिर्फ शराब की ही बिक्री नहीं घटी है, बल्कि स्टैम्प और रजिस्ट्रेशन फी से होने वाला आय भी काफी कम हो गया है। इससे पहले जितना राजस्व मिलता था। पिछले दो तीन महीने से उसके आस-पास भी राजस्व नहीं आ रह है। वित्त विभाग ने मई महीने तक स्टैम्प और रजिस्ट्रेशन फी से 5500 करोड़ रुपए आय होने की उम्मीद लगाई थी। लेकिन अप्रिल महीने तक इससे मात्र कुछ करोड़ रुपए ही राजस्व आया है।