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व्यक्तिगत लाभ के लिए पाला बदलते हैं नेता: संतोष पाठक

कांग्रेस पार्षद संतोष पाठक ने कोलकाता नगर निगम (केएमसी) के तृणमूल कांग्रेस बोर्ड पर अन्य दलों के पार्षदों के क्षेत्र के साथ सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाया। उन्होंने पिछले डेढ़ से दो दशक में विपक्ष का दमन करने की राजनीति शुरू होने का दावा भी किया।

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व्यक्तिगत लाभ के लिए पाला बदलते हैं नेता: संतोष पाठक

व्यक्तिगत लाभ के लिए पाला बदलते हैं नेता: संतोष पाठक

सौतेला व्यवहार कर रहा निगम का बोर्ड
कोलकाता. कांग्रेस पार्षद संतोष पाठक ने कोलकाता नगर निगम (केएमसी) के तृणमूल कांग्रेस बोर्ड पर अन्य दलों के पार्षदों के क्षेत्र के साथ सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाया। उन्होंने पिछले डेढ़ से दो दशक में विपक्ष का दमन करने की राजनीति शुरू होने का दावा भी किया। वर्ष 2005 से लगातार वार्ड नंबर 45 में जीत रहे पाठक ने मौजूदा राजनीति पर पत्रिका से खास बातचीत की। उनसे हुई बातचीत के कुछ अंश।
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प्रश्न: केएमसी में कांग्रेस के मात्र दो पार्षद हैं। तृणमूल बोर्ड आपके वार्ड की समस्याओं के हल करने में कितनी दिलचस्पी दिखाता है?
जवाब: मेरे वार्ड की सबसे बड़ी समस्या स्वयं तृणमूल कांग्रेस हैं। इसके नेता वार्ड के काम और विकास के रास्ते में बाधक हैं। बोरो के चेयरमैन मेरे वार्ड में इस लिए कोई काम ही नहीं करते हैं, क्योंकि लंबे समय से इस वार्ड से कांग्रेस जीतती है। बार-बार कहने पर निगम का बोर्ड मेरे वार्ड में कोई काम नहीं करता है। स्थिति यह है कि मेरे वार्ड में अभी तक स्वास्थ्य कार्यालय नहीं है। मैं एक गुजराती स्कूल में स्वास्थ्य कार्यालय चलाता हूं।
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प्रश्न: और भी कोई समस्याएं हैं, जो सीधे लोगों को प्रभावित करती हैं?
जवाब: मेरे वार्ड के कुछ हिस्सों में अभी पेयजल की समस्या है। निगम कहता है कि उक्त इलाका पोर्ट ट्रस्ट का इलाका है। इस कारण निगम उक्त इलाके में पीने का पानी की व्यवस्था नहीं कर पा रहा है। इस बारे में पोर्ट से बात करनी होगी। लेकिन निगम ने नीमतला इलाके में पीने की व्यवस्था की है। सिर्फ मेरे वार्ड के प्रति ही नहीं, बल्कि निगम के तृणमूल बोर्ड अन्य दलों के पार्षदों के वार्ड के साथ भी सौतेला व्यवहार कर रहा है। यह नई राजनीतिक संस्कृति शुरू हो गई है।
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प्रश्न: क्या आपको भी तृणमूल में शामिल होने का प्रस्ताव मिला है?
जवाब: सिर्फ प्रस्ताव ही नहीं, राज्य सरकार किसी न किसी रूप में तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने के लिए दबाव डालती रही है। लेकिन मैं हमेशा से दलबदल की राजनीति में विश्वास नहीं करता हूं। मैं छात्र जीवन से नीति और सिद्धांतों की राजनीति करता रहा हूं। जितना भी दबाव आए, लेकिन दल नहीं बदलूगा। दल बदलना होता तो मैं भी एमआईसी होता।
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प्रश्न: नेताओं के दलबदल से जनता को कितना लाभ होता है?
जवाब: नेताओं के पाला बदलने से उसके करीबी लोगों को कुछ लाभ मिलता है। लेकिन आम लोगों को इससे कोई लाभ नहीं होता है। इसका सबसे अधिक लाभ नेता को ही मिलता है। उसे हेराफेरी कर आमदनी करने का मौका मिलता है। तृणमूल में जाने पर यह यह मौका कुछ अधिक ही मिलता है। यही कारण है कि पशु और कोयला तस्करी से लेकर विभिन्न विभागों की नियुक्तियों में हुए घोटालों पर से पर्दा हटने पर तृणमूल के नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं।
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प्रश्न: केएमसी में विपक्ष के साथ कितना सहयोग किया जाता है?
जवाब: सिर्फ केएमसी ही नहीं, बल्कि दूसरे स्थानीय निकायों में भी विपक्ष को सम्मान नहीं दिया जाता है। पिछले 15 से 20 वर्षों में राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव आया है और वह है विपक्ष का दमन करने की राजनीति है।