
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) ने पश्चिम बंगाल विधानसभा के चुनावी तापमान को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। राज्य की तमाम राजनीतिक पार्टियां एसआईआर के गणित को हल करने में जुटीं हैं। तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि जिस तरह आनन-फानन में एसआईआर की प्रक्रिया पूरी की गई वो ठीक नहीं है। बड़ी संख्या में लोगों के नाम मतदाता सूची से कट गए। वे मताधिकार से वंचित रह जाएंगे। दूसरी तरफ भाजपा का दावा कि इससे पूरी चुनाव प्रक्रिया स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से होगी।
तेज होते आरोप प्रत्यारोप और बनते बिगड़ते राजनीतिक समीकरणों के बीच पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी ने कोलकाता में जन-गण-मन यात्रा के तहत विधानसभा चुनाव के विभिन्न पहलुओं पर राजनेताओं से चर्चा की। कोठारी से हुई बातचीत में राज्य के नेताओं ने एसआईआर समेत तमाम मुद्दों से उन्हें अवगत कराया। सभी ने दावा किया कि उनकी पार्टी चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करेगी। वहीं कोठारी ने जाना कि असल में क्या चल रहा है? राज्य में कौन-कौन मुद्दे अहम साबित हो सकते हैं।
राज्य की महिला एवं बाल विकास और समाज कल्याण मंत्री शशि पांजा ने कहा कि हम इसलिए एसआईआर का विरोध कर रहे हैं क्योंकि बड़ी संख्या में हिन्दुओं के नाम भी कटे हैं। इतनी जल्दबाजी क्या थी। राज्य में गलत राजनीतिक विमर्श गढ़ने के लिए एसआईआर का इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसा बताया जा रहा है कि सभी घुसपैठियों के नाम कटे हैं, जबकि ऐसा नहीं है। हमें लोगों को समझाने में काफी समय लग रहा है। मंत्री ने आरोप लगाया कि आम जनता उन्नयन नामक नई पार्टी खड़ी की गई ताकि वो पार्टी वोट काट सके। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने मतुआ समाज से वादाखिलाफी की है। उनको नागरिकता भी नहीं मिली और उनके नाम भी कट गए।
Published on:
17 Apr 2026 11:59 am
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