
कोलकाता.
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में बैठ कर अब राज्य के किसी भी इलाके की जमीन का रजिस्ट्रेशन कराना आसान हो जाएगा। राज्य के वित्त मंत्री डॉ. अमित मित्रा ने 2018-19 बजट प्रस्ताव में स्टैम्प ड्यूटी घटाते हुए इसकी घोषणा की है। इससे राज्य के राजस्व पर अनुकूल असर पडऩे के अलावा जमीन रजिस्ट्रेशन की संख्या बढऩे तथा राजस्व घाटे से निपटने में मदद मिलेगी। मित्रा ने राज्य विधानसभा में वित्त विधेयक पर जवाबी भाषण मेें कहा कि 2018-19 के बजट प्रस्ताव में राज्य सरकार स्टैम्प ड्यूटी पर एक फीसदी की कमी का प्रस्ताव रखा है। सरकार का प्रस्ताव एक फरवरी 2018 से ही लागू हो गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को वित्त वर्ष 2016-17 में स्टैम्प ड्यूटी से 3293.57 करोड़ रुपए का लाभ हुआ था। जबकि 2017-18 में दिसम्बर 2017 तक 3869.82 करोड़ रुपए बतौर स्टैम्प ड्यूटी वसूला गया है। उनके अनुसार इसमें 17.5 फीसदी का इजाफा हुआ है।
24 घंटे में जमीन रजिस्ट्रेशन की डिलेवरी-
विपक्ष कांग्रेस और वाममोर्चा की आलोचना का जवाब देते हुए डॉ. मित्रा ने कहा कि राज्य सरकार ई-पंजीकरण को बढ़ावा देने के पक्ष में है। उन्होंने कहा कि इसका लाभ जमीन खरीदने वालों को मिलेगा। मित्रा ने बताया कि जमीन रजिस्ट्रेशन होने के 24 घंटे के भीतर रजिस्ट्रेशन से संबंधित कागजात (दलील) की डिलेवरी करने की व्यवस्था होगी। मित्रा के अनुसार पश्चिम बंगाल एक मात्र राज्य है जहां पूरी व्यवस्था ऑनलाइन हो चुकी है। ऑनलाइन की मदद से जमीन की दलील की प्रमाणित कॉपी भी निकाली जा सकेगी।
धोखाधड़ी से बचाने के उपाय-
उन्होंने कहा कि जमीन रजिस्ट्री के समय ही म्यूटेशन की प्रक्रिया भी पूरी कर ली जाएगी। ताकि लोगों को धोखाधड़ी व विवाद में फंसने से बचाया जा सके। राज्य की कर व्यवस्था पूरी तरह से डिजीटलीकरण हो गया है। उन्होंने आश्चर्य व्यक्त किया कि केंद्र की जल्दबाजी के कारण कई राज्यों में अभी भी यह व्यवस्था विकसित नहीं हो पाई है। नतीजा यह हुआ कि केंद्र सरकार का पोर्टल काम करना बंद कर दिया है।
Published on:
09 Feb 2018 05:13 pm
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