
सात्विक भोजन अमृत और तामसिक जहर समान’
कोलकाता. आहार का विचारों के साथ गहरा संबंध है। जैसा खाए अन्न वैसा होए मन कहावत आज विज्ञान की कसौटी पर शत प्रतिशत खरी उतर रही है। तामसिक भोजन क्रूर विचारों को जन्म देता है। राष्ट्रसंत कमल मुनि कमलेश ने महावीर सदन में धर्मसभा को संबोधित करते हुए यह उद्गार व्यक्त किए। मुनि ने कहा कि तामसिक भोजन से मनुष्य अशांत तो होता ही है, साथ ही तामसिक भोजन से जो ज्वाला निर्मित होती है वह सद्गुणों को नष्ट कर देती है। कमल मुनि ने कहा कि विश्व के सभी महापुरुषों ने सात्विक भोजन ही अपनाया था और जनता को भी यही संदेश दिया कि तामसिक भोजन तनाव, टकराव और हिंसा पैदा करता है। तामसिक भोजन ब्लड प्रेशर, हार्ट, किडनी और लीवर आदि जानलेवा रोगों का शिकार भी बनाता है, उन्माद पैदा करता है व्यक्ति के ज्ञान और विवेक का दीपक बुझ जाता है। वह अंधेरी गलियों में भटकने के समान काम करने लगता है। जैन संत ने बताया कि सात्विक भोजन करना चारों धाम की यात्रा करने से बढक़र है। दिलों में साक्षात परमात्मा का निवास हो जाता है।
आज विज्ञान ने भी सात्विक भोजन को औषधि के रूप में मान्य किया है और विश्व स्तर पर लोकप्रिय भी हो रहा है
सात्विक भोजन अमृत और तामसिक भोजन जहर के समान है। सात्विक आहार के बिना विश्व शांति का सपना कभी सफल नहीं हो सकता। आज विज्ञान ने भी सात्विक भोजन को औषधि के रूप में मान्य किया है और विश्व स्तर पर लोकप्रिय भी हो रहा है। उन्होंने कहा कि अनीति और अन्याय से उपार्जित सात्विक भोजन भी तामसिकता के रूप में परिवर्तित हो सकता है। सात्विक देवों का और तामसिक राक्षसों का भोजन है। धर्म के नाम पर तामसिक भोजन को महामंडित करना परमात्मा के साथ अन्याय करने के समान है। करुणा, वात्सल्य प्रेम और सद्भाव जैसे मानवीय गुणों का विकास सात्विक आहार से ही संभव है। तपस्वी घनश्याम मुनि का 17 उपवास शुक्रवार को रहा। कौशल मुनि ने मंगलाचरण किया। बड़ा बाजार जैन स्थानक भवन से महासती तपस्या का अनुमोदन करने यहां पहुंची। महिला मंडल ने तपस्या के गीत प्रस्तुत किए।

Published on:
27 Aug 2018 03:18 pm
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