
50 साल से बहा रहे गीतों की सरिता
उनके दिल में गीत और संगीत बसता
रवीन्द्र राय
कोलकाता. भले ही वे अपना बिजनेस संभाल रहे हैं, पर उनके दिल में गीत और संगीत बसता हैं। जब वे गाते हैं तो लोग उनके सुर में सुर मिला कर गाना शुरू कर देते हैं। ऐसी ही शख्सियत हैं गायक बसंत मोहता। राजस्थान के बीकानेर जिले के देशनोक गांव के मूल निवासी मोहता पिछले 50 साल से भी अधिक समय से देश के कोने-कोने में गीत-संगीत की सरिता बहा रहे हैं। फिल्मी, भजन, मारवाड़ी, देशभक्ति, हर प्रकार के गाने गाकर वे श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देते हैं।
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विरासत में संगीत
मोहता ने बताया कि उन्हें संगीत विरासत में मिला है। दादा गोकुल दास मोहता गाते थे। पिता बि_ल दास मोहता भी सुर सजाते थे। श्रीमाहेश्वरी विद्यालय में पढऩे के दौरान उन्होंने कक्षा 6 में पहली बार सार्वजनिक रूप से हारमोनियम बजाया और गाया। तब से यह सिलसिला जारी है।
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खाटू है थारो धाम
बसंत मोहता कहते हैं कि उनके गीतों के कई एलबम हैं जिनमें खाटू है थारो धाम, म्हारी दादी, मेहर करो मां, जय श्री श्याम प्रमुख हैं। टी सीरीज में भजनों की सीडी भी है।
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देश विदेश में गायन
मोहता ने देश के अलावा विदेशों में भी गाया है। दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग के सैंडटन हिन्दू समाज राधे श्याम मंदिर में भजनों की सरिता बहाई थी। दिल्ली, फिर चेन्नई में मोहम्मद रफी नाइट में 26 गाने लगातार गाकर श्रोताओं का दिल जीत लिया था।
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कई संस्थाओं से जुड़े
मोहता कई धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं से भी जुड़े। वे बलदेवजी गवरजा सेवा ट्रस्ट की मंडली में संगीत निर्देशक, माहेश्वरी संगीतालय के सचिव रह चुके हैं। संगीत कला मंदिर के आयोजनों में भी उन्होंने हिस्सा लिया। वे "सरगम" के संस्थापक सदस्यों में हैं।
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गुलाम अली ने दी बड़ी सीख
मशहूर गजल गायक गुलाम अली ने बसंत मोहता को बड़ी सीख दी थी। 2009 में एक मुलाकात के दौरान उन्होंने कहा था कि एक गायक को अपनी आवाज के स्तर से ऊपर नहीं जाना चाहिए। जब गायक थक जाए तो गाने गाना बंद कर दे।
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ऋषि कपूर के साथ यादगार पल
मोहता कहते हैं कि वे एक बार कला मंदिर में गीत पेश कर रहे थे। तब वहां मशहूर अभिनेता ऋषि कपूर भी मौजूद थे। ऋषि कपूर मंच पर आकर मेरे गीतों पर नृत्य करने लगे। तालियों की गडग़ड़ाहट के बीच यह देखकर मेरा मन गदगद हो गया।
Published on:
09 Sept 2021 04:45 pm
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