सैकड़ों युवक मुफ्त कोचिंग का उठा रहे लाभ
-कैप्शन : सुमित कुमार के कोचिंग सेंटर में पढ़ते युवा।
2. युवाओं को पढ़ाते सुमित कुमार ।
कोलकाता . आज देश में बेहतर शिक्षा के नाम पर बड़े-बड़े संस्थान मोटी रकम वसूल रहे हैं। खासकर अगर सरकारी नौकरी की बात की जाये, तो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए देश के कोने-कोने में दर्जनों ऐसे संस्थान चल रहे हैं, जहां सिर्फ दाखिला के लिए ही लाखों रुपये लिए जाते है। फिर सरकारी नौकरी के लिए युवाओं को विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करवाई जाती है, लेकिन कोलकाता महानगर से महज 20 किलो मीटर दूर स्थित टीटागढ़ में एक ऐसा युवा शिक्षक है, जो पिछले तीन साल से सैकड़ों युवाओं को नि:शुल्क कोचिंग करा रहा हैं और उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार कर रहा है। इस नि:शुल्क कोचिंग केंद्र के कई युवा सरकारी नौकरी परीक्षाओं में बाजी मार चुके हैं। इस शिक्षक का नाम सुमित कुमार है। सुमित कुमार मूल रूप से बिहार के आरा के निवासी हैं जो टीटागढ़ रेलवे स्टेशन संलग्न चार नंबर रेलवे लाइन किनारे स्थित परित्यक्त रेलवे क्वार्टर में बच्चों को नि:शुल्क कोचिंग दे रहे हैं।
एक समय पैसे के अभाव में ट्यूशन से हो गये थे वंचित
सुमित कुमार का कहना है कि जब वे पढ़ते थे तो पैसे के अभाव में एक बार उन्हें ट्यूशन छोडऩा पड़ गया था, जिस कारण उस दिन से उनके मन में यह बात आई कि आर्थिक समस्या के कारण किसी को ट्यूशन से वंचित नहीं होना पड़े, जिस कारण उन्होंने नि:शुल्क कोचिंग कराना शुरू किया। उनका कहना है कि उनके पिता भोला यादव पेशे से दूध के कारोबारी हैं। पिता भी हमारे इस नि:शुल्क कोचिंग में लगने वाले कुछ खर्च में मदद करते हंै, जैसे कि बच्चों को नोट्स आदि मुहैया कराने में लगनेवाले खर्च वे ही देते हैं।
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अब तक दो सौ युवाओं को मिल चुकी है नौकरी
उनका कहना है कि उनके यहां पढक़र इन कुछ सालों में लगभग दो सौ युवाओं को विभिन्न सरकारी नौकरी मिल चुकी है। इस साल ही एसएससी जीडी में 63 युवा प्रतियोगीक परीक्षा में सफल हुए हंै। इसके साथ ही आर्मी में तीन, एसएससी में 20, रेलवे में 15, एफसीआई में दस और राज्य स्तरीय कई सरकारी परीक्षाओं में बच्चे सफल हुए हैं।
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युवाओं को भी पढ़ाने के लिए कर रहे प्रेरित
सुमित कुमार खुद पढ़ाने के साथ-साथ शिक्षित व पढ़े युवाओं को भी बच्चों को नि:शुल्क कोचिंग कराने के लिए प्रेरित कर रहे है। उनके कोचिंग के ही कई विद्यार्थी कक्षा एक से लेकर बारहवीं तक के बच्चों को वहां अन्य दो कमरे में नि:शुल्क पढ़ाते हैं। खुद पढऩे के साथ ही बच्चों को भी पढ़ाते हैं। इसके अलावा बैरकपुर में भी एक सेंटर में नि:शुल्क कॉलेज के बच्चों को पढ़ा रहे हैं। वहां भी शिक्षक रखकर चलाया जा रहा है। इन सभी कक्षाओं के लिए कई सारे शिक्षक भी रखे हैं।
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30 बैच में पढ़ रहे सैकड़ों युवा
सुमित कुमार का कहना है कि वे दस बेरोजगार युवाओं को लेकर पढ़ाना शुरू किए थे, लेकिन आज सैकड़ों युवा उनके यहां पढऩे आते हैं। सुबह साढ़े पांच बजे से कक्षाएं शुरू होती है और रात तक चलती है। कुल 30 बैच अभी चल रहे हैं। कई बार परीक्षा नजदीक होने के कारण दूर से आनेवाले युवा उनके यहां ही रात में रह जाते हैं और सुबह फिर घर लौटते हंै। उनके पास आसपास के ही नहीं बल्कि नदिया, विधाननगर, सियालदह, राणाघाट इलाके से भी युवा उनके यहां पढऩे आ रहे हैं।
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शिशु शिक्षा केंद्र में हैं 120 विद्यार्थी, पर पढ़ाने वाला कोई नहीं
-एक शिक्षक था तो वह भी जनवरी में हो चुका सेवानिवृत
-(फोटो ) कैप्शन : सडक़ जाम करते विद्यार्थी और अभिभावक
खडग़पुर . खडग़पुर ग्रामीण थाना अंतर्गत खडग़पुर-मकरामपुर के धाडि़म्बा गांव में शिशु शिक्षा केंद्र है। जहां 120 बच्चे पढऩे जाते हैं। लेकिन इस स्कूल में पिछले कई दिनों से एक भी शिक्षक नहीं है। इससे विद्यार्थी और उनके अभिभावक भडक़ गए। कई घंटे सडक़ जाम किया और शिक्षक नियुक्ति की मांग करते नारे लगाए। पुलिस के हस्तक्षेप पर स्थिति सामान्य हुई पर कई घंटे तक इस इलाके का यातायात प्रभावित हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि वे पिछले कई सालों से स्कूल में शिक्षक अभाव को लेकर स्थानीय प्रशासन को सूचित कर रहे हैं। लेकिन उनकी बातें अनसुनी की जा रही है।
जनवरी से नहीं है कोई शिक्षक
स्थिति तब भयंकर हो गई जब जनवरी महीने में स्कूल का एकमात्र शिक्षक सेवानिवृत हो गया। इसके बाद स्कूल में कोई शिक्षक नहीं है जो बच्चों को पढ़ा सके। हर रोज विद्यार्थी स्कूल में आते हैं और चले जाते हैं। उनको पढ़ाने वाला कोई नहीं है। शिक्षक की गौर मौजूदगी में कई छात्र मनमानी करने लगे हैं और अनुशासनहीन हो गए हैं। इससे अन्य बच्चों पर भी गलत प्रभाव पड़ रहा है। बच्चों और अभिभावकों के सब्र का बांध सोमवार को टूट गया। वे नाराज हो सडक़ पर उतर गए और सडक़ को जाम कर दिए। जिससे इलाके में यातायात प्रभावित हुआ। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पिछले कई वर्षों से धाडि़म्बा शिशु शिक्षा केन्द्र शिक्षक के अभाव को झेलते आ रहा है। ग्रामीणों ने कई बार स्थानीय प्रशासन से शिक्षक नियोग की मांग की।
बच्चे रोज जाते हैं स्कूल
अभिभावकों का कहना है कि बच्चे रोज स्कूल तो जाते हैं, पर शिक्षक नहीं होने से वे शिक्षा प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं। बच्चों के अभिभावकों का कहना है कि शिक्षक नहीं होने के कारण बच्चे अनुशासनहीन होने के साथ-साथ शिक्षा प्राप्त करने से वंचित हो रहे हैं। सूचना मिलते ही पुलिस इलाके में पहुँची। लोगों से रास्ते से हटने का अनुरोध करते हुए जल्द ही समस्याओं का समाधान कर देने का आश्वासन दिया। इसके बाद परिस्थिति सामान्य हुई।
