West Bengal Assembly Elections 2021: हरमद- बंगाल की राजनीति का वह शब्द जिसका मतलब जानना जरूरी है

हाईलाइट्स
- तृणमूल और भाजपा कर रही हैं इस शब्द का प्रयोग
- संगठित सशस्त्र कैडर के लिए किया जाता है इस्तेमाल
- क्रूर हिंसा से जुड़ा हुआ है शब्द

By: Paritosh Dube

Published: 19 Mar 2021, 03:20 PM IST

कोलकाता.
पश्चिम बंगाल की राजनीति में वर्षों से एक शब्द का प्रयोग तृणमूल कांग्रेस और भाजपा करती आ रही है, शब्द है हरमद। तृणमूल सुप्रीमो और भाजपा नेता इसके साथ वाहिनी भी जोड़ देते हैं तो शब्द बन जाता है हरमदवाहिनी। पाठकों में इस बात की जिज्ञासा जरूर होती होगी कि आखिर हरमद का मतलब क्या है और इसका प्रयोग तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के नेता क्यों करते हैं।
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औपनिवेशिक इतिहास से जुड़ा है
इस शब्द की उत्पत्ति कहां से हुई। यह सवाल बंगाल के औपनिवेशिक इतिहास से जुड़ा हुआ है। शब्द यूरोपीय है और लगभग पांच शताब्दी पुराना है। जिसका अनुकूलन या विकृत स्वरूप बांग्ला भाषा में हरमद के रूप में हुआ है। शब्द स्पेन और ब्रिटेन की जंग के दौरान का है। जिसमें स्पेन के ३० हजार सशस्त्र बेड़े को अंग्रेजी नौसेना ने परास्त किया था। उस स्पेनिश बेड़े को आर्मडा कहा जाता था। यह युद्ध सन १५८८ में हुआ था। जिसने वैश्विक स्तर पर ब्रिटेन के सर्वशक्तिमान होने की नींव तैयार की थी। ऐसा नहीं था कि युद्ध के बाद आर्मडा की जंग के योद्धा, सहयोगी पूरी तरह से खत्म हो गए थे। वे विश्व भर में फैल गए। जहां कहीं भी मौका मिला लूट पाट की, नौका के सहारे तेजी से आकर वारदात की फिर उसीकी के सहारे फरार हो गए। तत्कालीन बंगाल जिसमें मौजूदा बांग्लादेश भी शामिल था की भौगोलिक स्थिति इन सशस्द्ध नौका सवार डकैतों के लिए मनमाफिक थी। इसलिए स्थानीय समाज उन्हें आर्मडा की जगह हरमद बोलने लगा, जिसे समाज की स्वीकृति भी मिल गई।
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रक्तरंजित बंगाल में बना वामपंथी हिंसा का पर्याय
इसका मतलब यह हुआ कि सदियों पुराने ऐसे सशस्त्र लुटेरे जो तेज गति के माध्यम से आकर अपना हित साध कर, हिंसा कर फरार हो जाएं उन्हें हरमद कहा जा सकता है। शब्द की इसी सामाजिक स्वीकार्यता ने उसे रक्तरंजित बंगाल की राजनीति में वामपंथी सशस्त्र कैडरों का समानार्थी बना दिया।
तभी तो तृणमूल सुप्रीमो बरसों से इस शब्द का इस्तेमाल कर रही हैं। राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद भाजपा इस शब्द का इस्तेमाल माकपा से तृणमूल में आए लोगों के लिए करती रही। अब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 से पहले एक बार फिर ममता हरमदवाहिनी शब्द का इस्तेमाल कर रही हैं। इस बार वे कहती हैं कि माकपा के हरमद भाजपा के साथ आ गए हैं।
सामाजिक विज्ञानी श्याम देवनाथ कहते हैं हरमदवाहिनी चुनाव से पहले सक्रिय होती है। इसके सदस्य अब नाव से नहीं मोटरसाइकिलों से जाकर गांव देहात में मतदाताओं को धमकाते हैं। उन्हें मतदान करने से रोकते हैं। जरूरत पडऩे पर हिंसा का सहारा लेते हैं। इनका विचारधारा या दल से कोई लेना देना नहीं, सत्ता के साथ उनकी निष्ठा बदल जाती है।
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क्या कहते हैं भाषाविद
बंगाली विद्वान और जादवपुर विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर अचिंता विश्वास कहते हैं शब्द डच शब्द आर्मडाज् का विकृत रूप है। जिसका अर्थ है समुद्री डाकू या लुटरे जो सदियों पहले अपनी क्रूरता के लिए कुख्यात थे। संभव है कि 18 वीं शताब्दी में डच शब्द को बंगाल में लाए और उसका विकृत रूप हरमद यहां लोकप्रिय बन गया। कुछ लोग दावा करते हैं कि स्पेन के लोग इस शब्द को बंगाल में लाए। बिस्वास ने बताया कि यह शब्द आम बोलचाल में शामिल हो गया। इसलिए इसे सन 1886 में हॉबसन-जॉब्स डिक्शनरी में दर्ज किया गया।
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चिदम्बरम- बुद्धदेव पत्र युद्ध में शामिल था शब्द
दिसंबर 2010 में तत्कालीन मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्जी ने उस समय कड़ी आपत्ति जताई थी, जब राज्य में बढ़ती हिंसा को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम की ओर से भेजे गए एक आधिकारिक पत्र में हरमद शब्द का इस्तेमाल किया गया था। गुस्साए सीपीएम नेताओं ने तब यह भी कहा था कि वास्तव में ऐसा कोई शब्द मौजूद नहीं है और चिदंबरम को पत्र लिखने से पहले किसी ज्ञानी बांग्लाभाषी के साथ परामर्श करना चाहिए था।
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भाजपा भी जता चुकी है विरोध
जून 2019 में तृणमूल महासचिव पार्थ चटर्जी की ओर से केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह को लिखे गए पत्र में भी हरमद शब्द का इस्तेमाल किया गया था। जिसपर भाजपा नेता मुकुल राय ने आपत्ति जताते हुए कहा था कि आधिकारिक पत्र में इस तरह के शब्द का इस्तेमाल ठीक नहीं है।

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