
बिजली पंखे बने स्मार्ट
बंगाल में उर्जा-सक्षम नई तकनीक वाले पंखों के प्रति बढ़ा लोगों का रुझान
कोलकाता
भारत जैसे उष्णकटिबंधीय देश में इलेक्ट्रिक लाइट के बाद घर और कार्यालयों में पंखा सबसे आम उपकरण हैं। पुराने विश्वसनीय और किफायती सीलिंग और अन्य पंखे फैशन मेें बनने हुए हैं। लेकिन तकनीक के बदलने से परम्परागत पंखे कई सुविधाओं से एकीकृत और उर्जा-सक्षम स्मार्ट बन रहे हैं।
विभिन्न कंपनियां बीएलडीसी मोटर में आधुनिक तकनीक समाहित कर रीमोट कंट्रोल, एलइडी, अमेजन इको, गुगल होम या सेंसर, स्पीड मोड, इक्को फ्रेंडली मोड ह्युमन सेंसिंग मोड और समर विंटर मोड्स जैसी विशेषताएं और सुविधाएं लैस उर्जा-सक्षम स्मार्ट पंखे बना रही हैं। लोगों में आकर्षक पैदा करने इन ब्रांडेड पंखे की मांग बढऩे से बंगाल सहित देश में इनका बाजार गुलजार हो रहा है।
देश में अच्छी तरह से स्थापित संगठित और असंगठित क्षेत्र के बिजली पंखा उद्योग पिछले कुछ वर्षों में काफी बढ़ी है। लेकिन ज्यादातर संगठित कंपनियों का कारोबार बढ़ा है, क्योंकि उपभोक्ता का रुझान ब्रांडेड और आधुनिक तकनीकी रूप से स्मार्ट और कुशल पंखे की ओर बढ़ रहा है।
25 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है स्मार्ट पंखों के कारोबार
अनुमानित तौर पर भारत में 10000 करोड़ रुपए पंखों का बाजार है। इसमें से प्रीमियएम या स्मार्ट सिलिंग फंखों का बाजार 1500 करोड़ का है और इन पंखों के कारोबार में 25 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है। कुल पंखे के कारोबार का करीब 15 से 18 प्रतिशत कभी प्रीमियएम सिलिंग और अन्य पंखे बनाने का केन्द्र रहे कोलकाता और बंगाल में होता है।
आईआीटी- बॉम्बे से स्नातक पास कर उद्यमी बने मनोज मीणास्मार्ट बिजली के पंखे बनाने वाली कंपनी अटमबर्ग टेक्नोलॉजिज के सह-संस्थापक है। वे कहते हैं कि बाजार में 50 प्रतिशत कम बिजली खर्च में अच्छी हवा देने वाले स्मार्ट पंखों की मांग बढ़ रही है। उन्होंने बाजार में 65 प्रतिशत बिजली बचत करने वाले गुरुलिया स्मार्ट पंखे बाजार में उतारा है। बंगाल के लोग हमेशा से नई तकनीक और बचत में विश्वास करते हैं। इस लिए यहां उर्जा-सक्षम स्मार्ट पंखों की मांग अधिक है। यहां 10 प्रतिशत पंखे ऑनलाइन बिकते हैंऔर भविष्य में बढऩे की संभावनाएं हैं।
चीन से खतरा घटा
विशेषज्ञों के अनुसार भारतीय स्मार्ट बिजली पंखों का भविष्य सुनहरा होते हुए निकट भविष्य में इनमें होड़ लगने की संभावना नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में भारतीय स्मार्ट पंखों की बाजार में मांग बढऩे और प्रतिस्पर्धा का अंतर घटने से चीनी पंखों से खरतरा घटा है।
Published on:
02 Oct 2019 06:32 pm
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