
एससी-एसटी पर मेहरबान हुईं बंगाल की सीएम ममता बनर्जी, उठाया यह कदम
कोलकाता.
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के कल्याण के लिए अपना ममता दिखाना शुरू कर दिया है। राज्य के गांवों से लेकर शहरों में बसे एससी-एसटी समुदाय के लोगों की समस्याओं को सुनने और उसका निवारण करने को लेकर गंभीरता दिखा रही है। बनर्जी ने इनके लिए दो नए आयोगों का गठन करने का फैसला किया है। उक्त समुदाय के लोगों की सरकार के प्रति शिकायतों का तेजी से निपटारा करना इसका मुख्य उद्देश्य माना जा रहा है। उल्लेखनीय है कि लोकसभा चुनाव में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस को एससी-एसटी बहुल क्षेत्रों में भाजपा के हाथों शिकस्त होना पड़ा था। राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने पार्टी विधायकों की बैठक में एससी-एसटी वाले क्षेत्र में नेताओं की ढीली पकड़ और समुदाय के लोगों से दूर होने का हार का प्रमुख कारण बताया था। इससे पहले विधानसभा के मानसून सत्र में सीएम ने उक्त समुदाय से जुड़े विभिन्न दलों के सभी 84 विधायकों के साथ विधानसभा में बैठक कर उनके विचारों और सुझावों को गंभीरता से सुनी थी। राज्य सचिवालय के सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार एससी-एसटी के लिए अलग-अलग आयोग बनाए जा रहे हैं। आईएएस स्तर के अधिकारी आयोग का अध्यक्ष और डीआईजी रैंक का आईपीएस अधिकारी आयोग के सदस्य होंगे। आयोग उक्त समुदाय के लोगों की शिकायतों के निवारण के लिए उपाय करेगा और लोगों को बेहतर सेवा प्रदान करने के लिए उनके सुझावों को सुनेगा।
इन जिलों पर विशेष नजर:
मुख्यमंत्री बनर्जी ने एससी-एसटी समुदाय के लोगों में अपनी पकड़ पहले जैसी मजबूत बनाने का अभियान चला रखा है। यही कारण है कि उनकी नजर पुरुलिया, मिदनापुर, बीरभूम, झाडग़्राम और बांकुड़ा जिले पर है। सूत्रों के अनुसार पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के मंत्री पद से राजीव बनर्जी को हटाकर समुदाय से जुड़े उत्तर बंगाल के वरिष्ठ विधायक विनय कृष्ण बर्मन को लाना उनके इस अभियान की एक कड़ी मानी जा रही है।
Published on:
30 Nov 2019 09:04 pm
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