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बंगाल की इस यूनिवर्सिटी में हो चुकी है कुलपति की हत्या- नक्सल दौर की रक्तरंजित यादों का गवाह रहा है जेयू

जंगी आंदोलन के लिए चर्चित रहने वाले इस विश्वविद्यालय का इतिहास भी अपने आप में किवंदती ही कहा जाएगा। इसी विश्वविद्यालय में कुलपति पद पर रहते हुए प्रो. गोपाल चंद्र सेन को अपनी जान तक गंवानी पड़ी थी। पूर्ववर्ती राज्यपाल और मौजूदा उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को लंबे समय तक इसी विश्वविद्यालय के परिसर में घेराव का सामना करना पड़ा था और केन्द्रीय राज्यमंत्री बाबुल सुप्रियो पर तो हमला भी हुआ था।

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बंगाल की इस यूनिवर्सिटी में हो चुकी है कुलपति की हत्या- नक्सल दौर की रक्तरंजित यादों का गवाह रहा है जेयू

बंगाल की इस यूनिवर्सिटी में हो चुकी है कुलपति की हत्या- नक्सल दौर की रक्तरंजित यादों का गवाह रहा है जेयू

कोलकाता.
बांग्ला प्रथम वर्ष के नाबालिग छात्र की हत्या के बाद जादवपुर विश्वविद्यालय का पुराना जख्म एक बार फिर हरा हो गया है। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में देश भर में नजीर गढऩे वाले इस उम्दा शैक्षणिक संस्थान की चर्चा के केन्द्र में फिर से वामपंथी- अति वामपंथी छात्र आंदोलन आ गया है। दशकों से इस विश्वविद्यालय में वामपंथी छात्र संगठनों का दखल है। दखल भी ऐसा कि वामपंथ के अलावा यहां किसी अन्य विचारधारा से जुड़े राजनीतिक दल के छात्र संगठन के लिए यहां जगह बनाना ठेढ़ी खीर है। जंगी आंदोलन के लिए चर्चित रहने वाले इस विश्वविद्यालय का इतिहास भी अपने आप में किवंदती ही कहा जाएगा। इसी विश्वविद्यालय में कुलपति पद पर रहते हुए प्रो. गोपाल चंद्र सेन को अपनी जान तक गंवानी पड़ी थी। पूर्ववर्ती राज्यपाल और मौजूदा उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को लंबे समय तक इसी विश्वविद्यालय के परिसर में घेराव का सामना करना पड़ा था और केन्द्रीय राज्यमंत्री बाबुल सुप्रियो पर तो हमला भी हुआ था।
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किताबी बस्ते में बम-असलहों का दौर
वो बीती शताब्दी के सातवें दशक की शुरुआत का समय था। पश्चिम बंगाल में रक्तरंजित राजनीति का दौर शुरू हो चुका था। सशस्त्र आंदोलन के सहारे सत्ता परिवर्तन का नारा देने वाले नक्सली गांव- खेतों से निकलकर महानगर कोलकाता के उच्च शैक्षणिक संस्थानों तक पहुंच चुके थे। किताबें रखने वाले बैग में पिस्तौल- बम रखे जाते थे। शाम का अंधेरा होते ही महानगर के कॉलेज पाड़ा की सडक़ों पर पुलिस के बूटों की आवाज और बमबाजी सुनाई देने लगती थी। कॉलेज पाड़ा से दूर महानगर के दूसरे हिस्से में ६५ एकड़ में फैले जादवपुर विश्वविद्यालय की कमान उस समय गांधीवादी प्रोफेसर गोपाल चंद्र सेन के पास थी। वे विश्वविद्यालय के कुलपति थे। विश्वविद्यालय में नक्सली- माओवादी, चरम वामपंथी सक्रिय थे। जो विश्वविद्यालय की इंजीनियरिंग विभाग की परीक्षाएं नहीं होने देने पर आमादा थे। कुलपति गोपाल चंद्र सेन ने परीक्षाएं कराने का बीड़ा उठाया। उनका मानना था कि जो छात्र परीक्षाएं देना चाहते हैं उनके लिए परीक्षा आयोजित करनी ही होगी। यह उनका दायित्व है। परीक्षाएं हुईं। उनके नतीजे भी तैयार किए गए। सर्दी की छुट्टियां शुरू हो गई थीं सो कुलपति निवास से ही प्रोविजनल सर्टिफिकेट वितरण किया जाने लगा। यह सब विश्वविद्यालय में चरम वामपंथियों को कहां पसंद आने वाला था। बातें शुरू हुई तो कुलपति तक खबर भी आई कि उनकी जान को खतरा है लेकिन गांधी जी के साथ 1930 के दशक से जुड़े गोपाल बाबू ने किसी तरह की सुरक्षा व्यवस्था लेने से इंकार कर दिया। यहां तक की वे कुलपति को मिलने वाली सहूलियत भी नहीं लेते थे, वाहन का प्रयोग नहीं करते थे। आवास से कार्यालय पैदल आना जाना करते थे।
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कार्यकाल के आखिरी दिन ही हुई हत्या
30 दिसम्बर 1970 कुलपति गोपाल चंद्र सेन के कार्यकाल का आखिरी दिन था। आखिरी फाइल साइन कर शाम साढ़े बजे वे कार्यालय से आवास के लिए निकले, परिसर के तालाब के पास ही उनकी हत्या कर दी गई। हत्या किसने की, क्यों की, यह अब तक पता नहीं चल पाया। हत्या का आरोप उस समय के चरम वामपंथियों पर लगा लेकिन न कोई सबूत मिला न गवाह। एक गांधीवादी, अहिंसावादी, सादगी से तकनीकी शिक्षा को लोकप्रिय कर रहे मैकेनिकल इंजीनियर मौत की नींद सुला दिए गए।
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महात्मा गांधी की सभाओं में संभालते थे माइक्रोफोन
गोपाल बाबू अपने स्कूल और कॉलेज के दिनों में महात्मा गांधी की सभाओ ंमें हाथ वाले माइक्रोफोन की जिम्मेदारी संभालते थे। वे ऐसे भारतीय इंजीनियर थे जो अमरीका के मिशिगन विश्वविद्यालय में वहां के मैकेनिकल इंजीनियरिंग के पुरोधा बोस्टन के साथ छात्रों को पढ़ाते थे। वे ऐसे भारतीय इंजीनियर थे जिसके मन में इंजीनियरिंग की स्वदेशी तकनीक छात्रों तक पहुंचाने की जीजिविषा कूट- कूट कर भरी हुई थी। वे ऐसे मैकैनिकल इंजीनियर थे जो जादवपुर विश्वविद्यालय की मैकेनिकल लैब को अपनी पाठशाला समझते थे। वे ऐसे इंजीनियर थे जिनका प्रोडक्शन इंजीनियरिंग पर तैयार किया गया पाठ्यक्रम आज भी इस क्षेत्र में मील का पत्थर माना जाता है।