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आखिरकार 9 दिन बाद बिना रथ पालकी से घर लौटे भगवान

इतिहास में पहली बार नहीं हुआ 624 वर्ष प्राचीन रथयात्रा का आयोजन

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आखिरकार 9 दिन बाद बिना रथ पालकी से घर लौटे भगवान

आखिरकार 9 दिन बाद बिना रथ पालकी से घर लौटे भगवान

BENGAL NEWS कोलकाता. पश्चिम बंगाल में हुगली जिले में बुधवार को उल्टे रथ के दिन महेश स्तिथ जगन्नाथ मंदिर में सुबह से पूजा पाठ का विधिवत रूप से आयोजन हुआ। इसके बाद शाम को भगवान को मौसी घर से वापस अपने घर पहुंचाया गया।भगवान की शिला मूर्तियों को पालकी पर विराजमान करके 1 किलोमीटर पदयात्रा करते हुए मंदिर तक पहुंचाया गया। ज्ञात हो कि पुरी के रथ को विश्व में प्रथम स्थान प्राप्त है जबकि 624 वर्ष प्राचीन महेश रथयात्रा को दूसरा दर्जा। 624 वर्ष के रथयात्रा के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब वैश्विक महामारी कोरोना के बढ़ते संक्रमण के वजह से प्राचीन रथ की डोर नहीं खिंची गई। भगवान को पालकी में बैठाकर झांकी निकालकर पैदल 9 दिन पहले उनके मौसी के घर पहुंचाया गया और बुधवार को उल्टे रथ के दिन पैदल पालकी में बैठाकर झांकी निकालकर उन्हें अपने स्थान पर वापस लाया गया। हालांकि परंपरा को बरकरार रखने के लिए रश्म को निभाया गया। पारंपरिक रूप से पूजा-पाठ का आयोजन भी हुआ। सरकारी निषेधाज्ञा का पालन करते हुए भक्तों को भगवान के दर्शन के लिए अनुमति दी गई। इस रथयात्रा और रथ मेले का आयोजन नहीं होने से काफी लोग मायूस हैं। मेले का आयोजन होने से अस्थाई दुकानदारों के रोजी-रोटी का जुगाड़ भी होता था उनके चेहरे पर उदासी छाई है। इधर रथ की डोर खिंचने से वंचित रह भक्त भी उदास है।