
WEST BENGAL---माता-पिता का अनादर ईश्वर का अपमान-- शास्त्री
BENGAL NEWS-कोलकाता। माता-पिता का अनादर ईश्वर का अपमान है। जिस पुत्र की चाहत में मन्नतें मांगी और प्राप्ति पर खुशी के थाल बजाए मिठाइयां बांटी फिर उसके लालन-पालन में पूरी जवानी खपा देने वाले पिता को जब वही संतान बड़ा होकर ठोकर मारे तिरस्कृत करे और घर से निकाल कर वृद्धाश्रम भेज दे तो कल्पना कीजिए कि उस पिता पर क्या गुजरती होगी?ऐसा करने वाले ये याद रखें कि वो जैसा अपने माता-पिता के साथ कर रहे ठीक वैसा ही उन्हें अपनी संतानों से भी मिलेगा। प्रकृति का यही नियम है कि हम जैसा बोयेंगे वैसा हमें मिलेगा। पं. मालीराम शास्त्री ने राजारहाट स्थित ममता का मंदिर में गुरुपूर्णिमा के अवसर पर आयोजित 3 दिवसीय आध्यात्मिक व्याख्यान के दूसरे दिन पितृदेवो भव पर व्याख्यान में यह उद्गार व्यक्त किए। शास्त्री ने पिता की महिमा पर कहा कि जो रक्षा करता है वह पिता कहा जाता है इसलिए पिता को संतान का रक्षा-कवच भी कहा जाता है। यही वजह है कि जग में माता के बाद पिता को वंदनीय माना गया।अगर हम भूल से भी इनको दुख पहुंचाते हैं तो हम घोर पाप करते हैं और उसका दंड हमें भोगना ही पडेगा। इस अवसर पर शास्त्री के पुत्र व ममता का मंदिर के संचालक संदीप ने माता-पिता की सेवा को ईश्वर की सर्वोत्तम पूजा बताते हुए कहा कि हर संतान के लिए उसके माता-पिता से बड़ा कोई भगवान नहीं होता। इस आयोजन के तीसरे दिन 24 जुलाई दोपहर 2 से 5 बजे तक ‘गुरु साक्षात परम ब्रह्म पर पं शास्त्री व संदीप व्याख्यान करेंगे। कोविड को ध्यान में रखते हुए 35एमएम चैनल पर सीधे प्रसारण के जरिए इस आयोजन से लोगों को इससे जुडकर इसका लाभ लेने का निवेदन किया गया।
Published on:
23 Jul 2021 09:39 pm
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