
WEST BENGAL-बीस तक ही होंगे विवाह, फिर देवगुरु हो जाएंगे अस्त
BENGAL NEWS-कोलकाता। इस साल बीस फरवरी तक ही विवाह-मांगलिक कार्यों के शुभ मुहूर्त है। इसके बाद देवगुरु वृहस्पति अस्त हो जाएंगे जिस कारण 14 अप्रैल तक विवाह के लिए कोई मुहूर्त नहीं है। यह कहना है ज्योतिषाचार्य पं. रवि छंगाणी का।छंगाणी ने मंगलवार को पत्रिका को बताया कि 24 फरवरी को देव गुरु बृहस्पति अस्त हो जाएंगे तथा इसी बीच होलाष्टक भी लगेगा। उसके बाद सूर्य के मीन मलमास शुरू होंगे। खरमास की शुरुआत 14 मार्च से होने के कारण मांगलिक कार्य भी नहीं हो पाएंगे । देवगुरु बृहस्पति 20 फरवरी सुबह 11.१३ मिनट पर कुंभ राशि में अस्त होंगे और 24 मार्च सुबह 9.35 मिनट पर इसी राशि में वे सामान्य स्थिति में लौटेंगे। वहीं 14 मार्च से खरमास शुरु हो जाएगा। गुरु के अस्त होने सूर्य के मार्च में मीन राशि में होने और खरमास के चलते फरवरी महीने की 20 तारीख तक ही विवाह होंगे। 15 अप्रैल बाद ही विवाह तथा मांगलिक कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त होंगे जो 8 जुलाई तक होंगे।
बोलचाल की भाषा में तारा लगना
उधर पण्डित महावीर शर्मा के अनुसार देव गुरु बृहस्पति के अस्त होने को सामान्य बोलचाल की भाषा में तारा लगना कहते हैं। तारा लगने पर शादी, विवाह, यज्ञोपवीत जैसे मांगलिक कार्य वर्जित रहते हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में बृहस्पति, शनि के स्वामित्व वाली कुंभ राशि में होने से आंशिक प्रभावी है। विवाह के लिए बृहस्पति-शुक्र का उदित रहना अनिवार्य होता है। बृहस्पति के अस्त रहने, 14 मार्च से खरमास और इसी दौरान होलाष्टक के कारण विवाह सहित मुंडन, यज्ञोपवीत संस्कार आदि मांगलिक कार्य भी नहीं होंगे।
ऐसे करें गुरु को मजबूत
शर्मा के मुताबिक वैदिक ज्योतिष में गुरु को शुभ फलदायी ग्रह माना गया है। जन्म कुंडली में गुरु ग्रह की स्थिति शुभ होने पर व्यक्ति को हर क्षेत्र में सफलता हासिल होती है। गुरु की कमजोर स्थिति से जातक को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। गुरु धनु व मीन राशि के स्वामी ग्रह हैं। यह कर्क राशि में उच्च व शनिदेव की राशि मकर में नीच के माने जाते हैं। प्रत्येक गुरुवार शिवजी को बेसन के लड्डू चढ़ाने के अलावा गुरूवार के दिन व्रत करें तथा अपने सार्म्थ्यनुसार पीली वस्तुओं का दान करना चाहिए।
विवाह के लिए त्रिबल शुद्धि जरूरी
छंगाणी ने कहा कि शास्त्रों के मुताबिक विवाह में गुरु ग्रह उदय होना आवश्यक माना जाता है। हमारे षोडश संस्कारों में विवाह का खास महत्व है। विवाह का दिन व लग्न निश्चित करते समय वर एवं वधू की जन्म पत्रिका अनुसार सूर्य, चंद्र व गुरु की गोचर स्थिति का ध्यान रखना अति आवश्यक होता है। जिसे त्रिबल शुद्धि कहा जाता है।
Published on:
16 Feb 2022 02:12 pm
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