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WEST BENGAL DIALYSIS- कहां मरीज की मौत के बाद एक साल तक चलता रहा इलाज, जानिए यहां

डॉक्टर मृत मरीज का DIALYSIS अस्पताल के बाहर एक सेंटर में कराते रहे, बदले में DIALYSIS CENTRE संचालक सरकार को फर्जी बिल भेजकर वसूलता रहा पैसा

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नेफ्रोलॉजिस्ट के नुस्खे के बिना डायलिसिस का आरोप

नेफ्रोलॉजिस्ट के नुस्खे के बिना डायलिसिस का आरोप

BENGAL DIALYSIS NEWS-कोलकाता। पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के सरकारी सदर अस्पताल में एक मरीज की मौत के एक साल बाद तक उसका इलाज चलता रहा। डॉक्टर मृत मरीज का DIALYSIS अस्पताल के बाहर एक सेंटर में कराते रहे। इसके एवज में डायलिसिस सेंटर संचालक सरकार को फर्जी बिल भेजकर पैसा वसूलता रहा। जी हां, यह कोई फिल्मी कहानी नहीं बल्कि हकीकत है। जलपाईगुड़ी अस्पताल में मृतमरीज के नाम डायलिसिस बिल का अनोखा मामले सामने आया। मरीज की मौत के बाद अस्पताल में मरीज के नाम पर फर्जी बिल बनाने का आरोप लगा है। जलपाईगुड़ी सदर अस्पताल डायलिसिस यूनिट के अधिकारियों पर बिल में हेराफेरी का आरोप लगा है। सूत्रों के अनुसार जलपाईगुड़ी सदर अस्पताल में डायलिसिस यूनिट कोलकाता स्थित एक कंपनी पीपीपी मॉडल पर संचालित करती है। हाल ही खुलासा हुआ कि अस्पताल मृत मरीज के नाम पर फर्जी डायलिसिस बिल बनाकर पैसे का गबन कर रहा था।
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सेवानिवृत्त होने के बाद गुर्दे की बीमारी का पता चला
जलपाईगुड़ी नगरपालिका के वार्ड- 9 निवासी पेशे से पुलिस अधिकारी दल बहादुर विश्वकर्मा के सेवानिवृत्त होने के बाद उन्हें गुर्दे की बीमारी का पता चला था। उनके परिजन उन्हें जलपाईगुड़ी सदर अस्पताल ले आए। दो साल तक डायलिसिस कराने के बाद 23 जून 2021 को उनकी मौत हो गई।इसके बाद घटना ने तब एक नया मोड़ ले लिया जब खुलासा हुआ कि अस्पताल में उस पुलिस अधिकारी के नाम से हर माह फर्जी बिल बनाया जा रहा। उस बिल के पैसे का अस्पताल की डायलिसिस यूनिट के अधिकारियों की ओर से गबन किया जा रहा है।

कई अन्य मृत मरीजों के नाम भी फर्जी बिल
परिजनों का आरोप है कि न सिर्फ विश्वकर्मा बल्कि कई अन्य मृत मरीजों के नाम भी फर्जी बिल बनाए गए। विश्वकर्मा के परिजनों को पता चला कि उनके नाम से फर्जी बिल बनाकर पैसे का गबन किया जा रहा है। परिजनों ने मामले की जांच के बाद आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

इनका कहना है
जलपाईगुड़ी के मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी प्रभारी डॉ. ज्योतिष चंद्र दास ने कहा कि उन्हें ऐसी कोई लिखित शिकायत नहीं मिली। आरोपों की जांच की जाएगी। उधर निजी डायलिसिस इकाई प्राधिकरण प्रभारी का कहना है कि वे 25 अप्रैल से जलपाईगुड़ी सदर अस्पताल में डायलिसिस इकाई प्रभारी हैं। तब से ऐसी कोई घटना नहीं हुई। उन्हें मालूम नहीं कि क्या यह पहले हुआ था। ---