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WEST BENGAL HARYALI AMAWSAYAA-4 खास योग के साथ मनेगी हरियाली अमावस्या

पर्व से पहले बाजारों में हरी चूड़ी से लेकर कंगन, बिंदी, साड़ी की बिक्री जोरों पर, अखण्ड सुहाग की कामना के साथ महिलाएं करेंगी 28 को शिव-पार्वती की पूजा

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WEST BENGAL HARYALI AMAWSAYAA-4 खास योग के साथ मनेगी हरियाली अमावस्या

WEST BENGAL HARYALI AMAWSAYAA-4 खास योग के साथ मनेगी हरियाली अमावस्या

BENGAL NEWS-कोलकाता। महानगर समेत प्रदेश में सावन माह की अमावस्या 28 जुलाई को हरियाली अमावस्या 4 खास योग के साथ मनाई जाएगी। इस बार हरियाली अमावस्या पर सर्वार्थ सिद्धि, अमृत सिद्धि, गुरु पुष्य योग और वज्र योग जैसे विशेष योग रहेंगे। इस अमावस्या पर पूजा-पाठ, स्नान-दान करना उत्तम माना गया है। राजस्थान सहित उत्तर प्रदेश तथा बिहार में प्रमुखता से मनाए जाने वाले हरियाली अमावस्या से पहले मंगलवार को बड़ाबाजार की कॉस्मेटिक दुकानों में खरीददारों की अच्छी भीड़ रही। बाजारों में हरी चूड़ी से लेकर चुनरी, कंगन, बिंदी, साड़ी तक बिक्री जोरों पर रही। हरियाली अमावस्या के दिन अखण्ड सुहाग की कामना के साथ महिलाएं शिव-पार्वती की पूजा कर श्रृंगार का सामान माता गौरी को चढाती है।
-----इनकी जुबानी
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सत्यनारायण पार्क के निकट हॉकर अनुज साव ने बताया कि इस दिन सुहागिन महिलाएं पार्वती को श्रृंगार सामग्री अर्पित करती हैं। इसलिए इनकी मांग ज्यादा रहती है। बड़ाबाजार निवासी मंजू शुक्ला ने बताया कि हरियाली अमावस्या पर विवाहित महिलाएं सिंदूर से देवी पार्वती की पूजा करती हैं और फिर प्रसाद बांटती हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दिन हरी चूडय़िां, सिंदूर, बिंदी बांटने से जीवनसाथी को लंबी उम्र मिलती है और घर में खुशियां भी आती हैं। लिलुआ निवासी रेखा पुरोहित ने कहा कि हरियाली अमावस्या के दिन पीपल और तुलसी की पूजा करने के बाद परिक्रमा की जाती है और मालपुआ को प्रसाद के रूप में चढ़ाने की भी परंपरा है। हावड़ा निवासी सरिता सिंह ने बताया कि हरियाली अमावस्या के दिन पूर्वजों के निमित भी कुछ कार्य किये जाते हैं। इस दिन जल्दी उठकर स्नान करने के बाद पितरों को प्रसन्न करने के लिए पूजा और ब्राह्मणों को भोजन भी कराया जाता है।
----पौधे लगाने का विशेष महत्व
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एक प्रचलित धारणा के अनुसार हरियाली अमावस्या के दिन पौधे लगाने का विशेष महत्व है। ऐसी मान्यता है कि हरियाली अमावस्या के दिन पौधा रोप कर उसकी देखभाल कर उसे पानी और खाद देने से पुण्य की प्राप्ति होती है। उधर प्रवासी राज्सथानी पण्डित रवि छंगाणी ने मंगलवार को पत्रिका को बताया कि अमावस्या तिथि बुधवार रात 9.11 पर है और 28 जुलाई रात्रि 11.24 बजे समाप्त होगी। इसलिए हरियाली अमावस्या 28 जुलाई को ही मानी जायेगी। उन्होंने बताया कि हरियाली अमावस्या की अलग अलग क्षेत्रों में अलग अलग मान्यताएं प्रचलित है। एक मान्यता के अनुसार भगवान शिव की पूजा की जाती है क्योंकि शिव भक्ति धन और समृद्धि से जुड़ी है। इस दिन शिव मंदिरों में विशेष दर्शन और अनुष्ठान होते हैं। कहा जाता है कि हरियाली अमावास्या के दिन रुद्राभिषेक पूजा करने से, बुरी आत्माओं और नकारात्मकता को दूर किया जा सकता है।---