
WEST BENGAL DR. RAJENDRA PRASAD--कोलकाता से था डॉ. राजेन्द्र प्रसाद का गहरा नाता
BENGAL NEWS-कोलकाता (शिशिर शरण राही)। स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख नेताओं में शुमार, संविधान निर्माण में योगदान, स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति देशरत्न
डॉ. राजेन्द्र प्रसाद का कोलकाता से गहरा नाता था। कलकत्ता विश्वविद्यालय में छात्र जीवन के दौरान वे अपने भाई के साथ ईडन हिंदू हॉस्टल में रहते थे। ईडन हिंदू हॉस्टल में अभी भी उनके स्मारक के रूप में एक पट्टिका मौजूद है। जिसमें यह अंकित है कि जुलाई 1902 से दिसंबर 1907 तक उन्होंने छात्र जीवन यहीं गुजारा था। प्रेसीडेंसी के समीप पीसी सरकार स्ट्रीट स्थित हिंदू हॉस्टल में उनकी ख्याति आज तक विद्यमान है। फिलहाल यहां सन्नाटा पसरा है। राजेन्द्र की जयंती की पूर्व संध्या पर पत्रिका ने हिंदू हॉस्टल की पड़ताल की तो बंद अवस्था में मिले हॉस्टल के गेट पर मिले एक कर्मचारी (नाम उजागर न करने की शर्त पर) ने बताया कि हॉस्टल बंद है। फिलहाल इसे यहां से राजारहाट स्थानांतरित कर दिया गया है।
-------
उच्च शिक्षा के लिए कोलकाता चुना
3 दिसंबर, 1884 को बिहार के सीवान जिले के जीरादेई गांव में जन्मे राजेन्द्र ने उच्च शिक्षा के लिए कोलकाता को ही चुना। छपरा जिला स्कूल के बाद आरके घोष अकादमी और फिर आगे शिक्षा के लिए कोलकाता पहुंचे और 1902 में प्रेसिडेंसी कॉलेज में दाखिला लिया। 18 वर्ष की उम्र में उन्होंने कोलकाता विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा दी। प्रवेश परीक्षा में उन्हें प्रथम स्थान प्राप्त हुआ था। 1902 में उन्होंने प्रेसिडेंसी कॉलेज में दाखिला लिया।
----‘द एग्जामिनी इज बेटर दैन द एग्जामिनर’
कोलकाता विश्वविद्यालय की की ओर से उन्हें 30 रुपये की स्कॉलरशिप मिलती थी। 1915 में कानून में मास्टर डिग्री हासिल कर कानून में ही डाक्टरेट भी किया। उनकी प्रतिभा पर उनकी एग्जाम शीट देखकर एक अंग्रेज एग्जामिनर ने अपनी टिप्पणी में लिखा था...‘द एग्जामिनी इज बेटर दैन द एग्जामिनर।’ 1907 में कलकत्ता विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में मास्टर डिग्री में गोल्ड मेडल जीता। 1909 में नौकरी छोड़ कानून में डिग्री हासिल करने के लिए फिर कोलकाता आ गए। कलकत्ता विश्वविद्यालय में कानून का अध्ययन करते हुए उन्होंने कलकत्ता सिटी कॉलेज में छात्रों को इकोनॉमिक्स सिखाया।
-----इनकी जुबानी
---
------भारतीय संविधान के आर्किटेक्ट
डॉ. राजेंद्र प्रसाद हमारे प्रथम राष्ट्रपति ही नहीं वरन एक राष्ट्र निर्माता और भारतीय संविधान के आर्किटेक्ट थे। जुलाई 1946 में जब संविधान सभा का गठन किया गया तब उनको ही इसका स्थायी अध्यक्ष नियुक्त किया गया। उन्होंने १949 तक संविधान सभा की अध्यक्षता की और भारत के संविधान के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।--प्रोफेसर (डॉ.) योगेश प्रताप सिंह, कुलपति नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी त्रिपुरा.
---
--अपनी मातृभाषा भोजपुरी से बहुत प्रेम करते थे
-----
राजेंद्र बाबू अपनी मातृभाषा भोजपुरी से बहुत प्रेम करते थे। अपने लोगों से हमेशा भोजपुरी में ही बात करते थे। अपनी मातृभाषा के प्रति हीन भावना से ग्रस्त लोगों को उनसे सीख प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने ही नामचीन अभिनेता नाजीर हुसैन को भोजपुरी भाषा में फिल्म बनाने के लिए प्रेरित किया था। मुंबई के एक समारोह में उन्होंने पास में बैठे नाजिर हुसैन से कहा था---रउरा जइसन भोजपुरिया फिल्म इंडस्ट्री में बा तबो आज ले कवनों भोजपुरी फिलिम ना बनल’?---मनोज भावुक, भोजपुरी कवि.
-------------
----प्रतिभावान व्यक्तित्व
राजेन्द्र प्रसाद अत्यंत प्रतिभावान व्यक्तित्व के धनी थे। प्रेसीडेंसी कॉलेज के एक परीक्षक ने लिखा था परीक्षार्थी परीक्षक से अधिक जानता है और उसने 100 में से 110 अंक दिए। भारत के राष्ट्रपति के रूप में उनका कार्यकाल शानदार और बिना किसी विवाद के रहा। हमें राजेंद्र प्रसाद पर गर्व है।---एडवोकेट, सामाजिक कार्यकर्ता और लेखक नारायण जैन.
Published on:
03 Dec 2022 11:58 am
बड़ी खबरें
View Allकोलकाता
पश्चिम बंगाल
ट्रेंडिंग
