
.WEST BENGAL YELLOW TAXI 2023....तो फिर विलुप्त हो जाएगी कोलकाता की शान पीली टैक्सी
BENGAL YELLOW TAXI 2023-कोलकाता। सिटी ऑफ ज्वॉय की खास पहचान विक्टोरिया मेमोरियल, ट्राम, रसगुल्ला की तरह ही मशहूर पीली टैक्सियां कोलकाता की सडक़ों पर धीरे-धीरे विलुप्त होने की ओर हैं। इनकी संख्या घट कर आज महज 7 हजार तक हो गई है जो 5 साल पहले 22 हजार थी। परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार उनकी संख्या 10 हजार से बहुत कम हो गई है। ऑपरेटरों का कहना है कि अन्य 2,500 में से सभी डी और ई श्रृंखला के एंबेसडर 2025 तक चरणबद्ध तरीके से बाहर हो जाएंगे, जिनकी गिनती 5 हजार से कम होगी। ऐप-आधारित कैब ने 5 साल पहले पीले टैक्सी बेड़े को पीछे छोड़ दिया जब पंजीकृत पीली टैक्सी की संख्या 22 हजार से कम हो गई थी।
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महामारी का पड़ा साया
2020 के पूर्व-महामारी के आंकड़ों से पता चला है कि पीली कैब की संख्या 18 हजार तक कम हो गई थी। इसके बाद 15 साल पुराने वाणिज्यिक वाहनों के लॉकडाउन और फेज-आउट ने हजारों को व्यवसाय से बाहर कर दिया। प्रारंभ में, टैक्सियां 2 प्रकार में उपलब्ध थी काले और पीले। समय के साथ संख्या घटती गई और अब केवल पीली कैब ही बची। पीली टैक्सी की विश्वसनीयता, दृढ़ता और अद्वितीय मजबूत दिखने के कारण इसे किंग ऑफ रोड में ब्रांडेड किया गया। अभी भी कोलकाता में शूट की गई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय फिल्मों में पीली टैक्सी सबसे अधिक व्यापक रूप से प्रदर्शित की जाती है।
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कोलकाता में टैक्सी 1908 से
-एक वरिष्ठ परिवहन अधिकारी के अनुसार, शहर में ऐप-आधारित कैब की संख्या महामारी के बाद लगभग 21 हजार तक जा पहुंची लेकिन पीली कैब की संख्या लगभग 7 हजार तक गिर गई। जबकि सफेद और नीली मीटर वाली कैब की संख्या लगभग 2,500 थी। कोलकाता में टैक्सी 1908 से चल रही है जब किराया महज 8 आने प्रति मील था। 1962 में जब कलकत्ता टैक्सी एसोसिएशन ने हिंदुस्तान मोटर्स के एंबेसडर को कैब में बदलने की पहल की तो पीली और काली टैक्सियों ने सडक़ों पर कदम रखा। अमूमन एक टैक्सी की कीमत अब 8 लाख से अधिक है।
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इनका कहना है
बंगाल टैक्सी एसोसिएशन के संयुक्त सचिव संजीब रॉय ने कहा कि बड़ी संख्या में कैब वाले परिचालन लागत में वृद्धि और किराए में संशोधन न होने के कारण कम रिटर्न ने उनको व्यापार छोडऩे के लिए मजबूर किया। इसके अलावा बैंक कैब खरीदने के लिए लोन नहीं दे रहे हैं। परिवहन मंत्री स्नेहाशीष चक्रवर्ती का कहना है कि यह अफ़सोस की बात है कि हम धीरे-धीरे एक ऐसे वाहक खो रहे हैं जो महानगर के इतिहास का खास अंग रहा है। हम ट्रांसपोर्टरों को प्रोत्साहित कर रहे हैं। पीले रंग की कैब को चरणबद्ध किया जा रहा है। 60 के दशक के टैक्सी ड्राइवर जसजीत सिंह का कहना है कि एक समय में 5टैक्सियों का मालिक था, लेकिन समय के साथ उनमें से 4को बेच दिया। फिलहाल जो मैं चलाता हूं इसे बेचने की कोशिश की लेकिन कोई भी खरीदने में दिलचस्पी नहीं ले रहा है। इसके अलावा मेरे किसी भी बेटे को पेशे में कोई दिलचस्पी नहीं है। मैं इस वाहन को चलाना जारी रखूंगा, लेकिन एक बार जब यह बंद हो जाएगा तो मैं भी पेशा छोड़ दूंगा क्योंकि अब कारोबार में कोई लाभ नहीं।
Published on:
18 Jan 2023 07:39 pm
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