BENGAL GANGAUR 2023-कोलकाता/बड़ाबाजार। राजस्थान के पारंपरिक त्यौहार ‘गणगौर’ का उत्साह इन दिनों कोलकाता से लेकर उपनगरीय क्षेत्रों में चरम पर है। 24 मार्च से शुरू होने वाले गणगौर मेले के पहले प्रवासी राजस्थानी महिलाओं ने रविवार को अपने मकानों और कम्प्लेक्स में सामूहिक रूप से गणगौर के गीत गाए। रविवार दिनभर रुक रुक कर हो रही बारिश भी महिलाओं का उत्साह कम नही कर पाई और गणगौर पूजन तथा गायन में बड़ी संख्या में महिलाओं ने हिस्सा लिया। बड़ाबाजार से लेकर हावड़ा, रिसडा, हिंदमोटर आदि उपनगरीय क्षेत्रों में गणगौर उत्सव की धूम रही। सुयोग्य वर तथा सौभाग्य की कामना लिए किये गए पूजन के साथ गीत गायन में पारंपरिक लोक गीतों के साथ ही नई रचनाओं का भी गायन किया गया। सहेलियां संघ हिंदमोटर द्वारा रविवार शाम हिंदमोटर में गणगौर पूजन तथा सिंधारा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर आयोजित गीत गायन में अंकिता भूतड़ा ने बताया कि इसर और गौर की आराधना के इस पर्व पर हम प्रत्येक वर्ष पूजन करते हैं। इसमें जयश्री मूंधड़ा, गरिमा चांडक, निकिता कोठारी आदि सक्रिय रही। बड़ाबाजार में भी जगह जगह गणगौर गीत गाये गए। मकान की छत पर प्रवासी राजस्थानी महिलाओं द्वारा ….म्हारी चांद गवरजा भला ए नादान, इसर जी घूम रहया गलियां में, बना रे बागा म झूला घाल्या, हरया हरया बागां म मेहंदी का आदि गीत गाये गए।
——–
राजस्थान की कला-संस्कृति का संयोजन
बड़ाबाजार निवासी विजयलक्ष्मी व्यास ने पत्रिका को बताया कि यह ऐसा पर्व है जिसमें राजस्थान की कला-संस्कृति का संयोजन है जिसे हम राजस्थान से दूर रहते हुए भी उत्साह के साथ सामूहिक तौर पर मनाते हैं। उधर हावड़ा में गणगौर का उत्साह चरम पर है। हावड़ा के गोकुल बैंक्वेट में बाहेती परिवार द्वारा गत दिनों आयोजित गणगौर कार्यक्रम में काफ़ी संख्या में महिलाओं व युवतियों ने हिस्सा लिया। यह प्रवासी परिवार सींथल (बीकानेर) का निवासी है तथा अपनी रोचक अनोखी प्रस्तुतियों के लिए जाने जाते हैं। 15 दिनों तक चलने वाले इस पर्व को मारवाड़ी समाज की युवतियां राजस्थान से मीलों दूर बंगाल की धरती पर अपनी गौरवशाली परम्परा को न केवल बखूबी निभा रही है बल्कि और समृद्ध बनाने में जुटी हैं।