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WEST BENGAL BHAGWAT 2023-कथा श्रवण से नहीं, मनन से लाभ : शास्त्री

पुरुषोत्तम मास पर नया मंदिर बांधाघाट में श्रीमद् भागवत् कथा सम्पन्न

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WEST BENGAL BHAGWAT 2023-कथा श्रवण से नहीं, मनन से लाभ : शास्त्री

WEST BENGAL BHAGWAT 2023-कथा श्रवण से नहीं, मनन से लाभ : शास्त्री

BENGAL BHAGWAT KATHA 2023कोलकाता/हावड़ा। पुरूषोत्तम मास में भागवत कथा का श्रवण करके आप सभी ने बहुत पुण्य का कार्य किया लेकिन इसका शत-प्रतिशत लाभ तब मिलेगा जब 7 दिनों में जो कुछ भी सुना उसको जीवन में उतारेंगे। सलकिया बांधाघाट स्थित बंगेश्वर महादेव नया मंदिर में सप्ताह व्यापी श्रीमद् भागवत महापुराण यज्ञ के समापन पर भागवत मर्मज्ञ पं. मालीराम शास्त्री ने यह बात कही। पुरूषोत्तम मास के उपलक्ष्य में सुभाष-पुष्पा, कैलाश-बबीता, संदीप-अंकिता व प्रीति-अमित अग्रवाल के यजमानत्व में भागवत महापुराण यज्ञ के समापन दिन शास्त्री ने कहा भागवत् श्रवण करते समय चित्त से समस्त विकारों को दूर रखना चाहिये। क्योंकि इसके लिये मन की स्थिरता का होना नितांत जरूरी है।शास्त्री ने कहा कि भागवत् श्रवण करते समय चित्त से समस्त विकारों को दूर रखना चाहिये । क्योंकि इसके लिये मन की स्थिरता का होना नितांत जरूरी है ।
उन्होंने कहा कि यह मनुष्य को स्वयं के कर्ता होने का दंभ नहीं पालना चाहिए । हमें यह सदैव स्मरण रखना चाहिये कि वह सिर्फ माध्यम है कर्त्ता तो कोई अद्वितीय अदृश्य शक्ति है जो उससे कार्य करवा रही है । पं. शास्त्री ने सुदामा चरित का वर्णन करते हुए कहा कि इस नश्वर संसार में केवल परमात्मा ही सच्चा साथी है बाकी सब मतलब की मित्रता है जब तक किसी का किसी से स्वार्थ सधता है तब तक तो मित्रता रहती है उसके बाद कोई मतलब नहीं रह जाता । वर्तमान में मित्रता का वास्तविक अर्थ लोप हो गया है ।
यह मनुष्य को स्वयं के कर्ता होने का दंभ नहीं पालना चाहिए। शास्त्री ने सुदामा चरित का वर्णन करते हुए कहा कि इस नश्वर संसार में केवल परमात्मा ही सच्चा साथी है बाकी सब मतलब की मित्रता है जब तक किसी का किसी से स्वार्थ सधता है तब तक तो मित्रता रहती है उसके बाद कोई मतलब नहीं रह जाता। वर्तमान में मित्रता का वास्तविक अर्थ लोप हो गया है। समापन अवसर पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा। सजन तायल, विष्णु पोद्दार, प्रदीप केडिया, सुदेश गोयल, रोहित अग्रवाल, रेवांश, अयांश आदि ने व्यास पीठ को प्रणाम कर आशीर्वाद प्राप्त किया। संचालन सुरेश कुमार भुवालका ने किया।