BENGAL NEWS कोलकाता। भारत विश्व गुरु था, है और रहेगा। असम के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने राजस्थान परिषद द्वारा रविवार को ओसवाल भवन सभागार में आयोजित स्मारिका लोकार्पण समारोह में बतौर मुख्य अतिथि यह बात कही। कटारिया ने कहा कि आजादी के संघर्ष का इतिहास 1000 वर्षों का है। असंख्य बलिदानियों ने अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया, तब जाकर हम आजाद हवा में सांस ले रहे तब आज हम इस मुकाम तक आये हैं। उनकी जीवन यात्रा ने हमें अपने अतीत से जोड़े रखा, अपने संस्कारों से जोड़े रखा। बलिदान की प्रेरणा अंतर्मन के संकल्प से उत्पन्न होती है। कोई अदृश्य शक्ति इसमे मदद करती है। राजस्थान परिषद के कार्यों की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि परिषद इतने लंबे समय से कोलकाता में राजस्थान की समस्त संस्थाओं को एक साथ लेकर कार्य कर रही है एवं प्रति वर्ष एक संग्रहणीय स्मारिका समयानुकूल विषय को लेकर निकाल रही है। इस बार आजादी का अमृत महोत्सव विषय भी बहुत सराहनीय है। गायक सत्यनारायण तिवाड़ी नें ….भारत म्हारो देस, ऊजळो भेष, के धन-धन भारती.. बोलो जय-जय कार, उतारो आरती..” प्रस्तुत किया। परिषद के उपाध्यक्ष बंशीधर शर्मा, भागीरथ चांडक, महावीर प्रसाद बजाज, मोहनलाल पारीक, उपमंत्रीद्वय सम्पत मानधना एवं अनुराग नोपानी, दुर्गा व्यास तथा डॉ वसुंधरा मिश्रा ने अतिथियों का स्वागत किया।
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स्मारिका का लोकार्पण कराया
सह सम्पादक भागीरथ सारस्वत ने स्मारिका का विषय रखा तथा सच्चिदानंद पारीक के साथ स्मारिका का लोकार्पण कराया। स्वागत भाषण राजस्थान परिषद के महामंत्री अरुण प्रकाश मल्लावत ने दिया। सच्चिदानंद पारीक ने संचालन किया तथा धन्यवाद ज्ञापन परिषद के अध्यक्ष शार्दुल सिंह जैन ने किया। समारोह अध्यक्ष उद्योगपति समाजसेवी बनवारी लाल सोती ने राजस्थान परिषद के आयोजन की तारीफ की। विशिष्ट अतिथि अखिल भारतवर्षीय मारवाड़ी सम्मेलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिव कुमार लोहिया ने राजस्थानी भाषा में अपना वक्तव्य रखते हुए राजस्थान की महिमा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि राजस्थान परिषद ने कोलकाता में महाराणा प्रताप की विशाल मूर्ति लगा कर स्तुत्य कार्य किया है।
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ये रहे मौजूद
समारोह में जयप्रकाश सेठिया, रामगोपाल सूंघा, तरुण सेठिया, अरुण लढा, रामदेव काकड़ा, राजेश नागोरी, ओमप्रकाश बांगड़, अनिल मल्लावत, प्रकाश पारख, सुरेश चौधरी, अमित तातेड, विकास अग्रवाल, गोविंद जैथलिया, जतन पारख, जगत सिंह बैद, गुलाब चंद मुंदड़ा, अशोक पुरोहित, संदीप जैन, रामचंद्र अग्रवाल, दीनदयाल जाजू आदि उपस्थित थे। पन्नालाल सुराणा, मनोज काकडा़, राजेश नागौरी, आनंद नारसरिया आदि सक्रिय रहे।