
WEST BENGAL KALI PUJA 2023-बगैर मूर्ति पेड़ के नीचे यहां होती है काली पूजा
अमूमन हर जगह काली पूजा मंदिरों या पंडाल में ही होती है। पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले के बलरामपुर नीतूरिया इलाके में बगैर मूर्ति-मंदिर बेल के पेड़ के नीचे काली पूजा पिछले 400 साल से लगातार होती आ रही है। रविवार को होने वाली काली पूजा को लेकर यहां शनिवार को सारी तैयारी पूरी कर ली गई। यहां दूर-दूर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं। पुरूलिया के एडीएम प्रणव घोष भी इस पूजा में शिरकत करेंगे। पुरूलिया सीमा के समीप बलरामपुर नीतूरिया के मालडी गांव के पास जाम्बनी मौजा में खुले आसमान तले पेड़ के नीचे पूजा की जाती है। यहां पर बलरामपुर की जंबोनी मां काली की कोई मंदिर या मूर्ति नहीं है। पूजा-पाठ करने वाले सेवक अमरनाथ बनर्जी ने यह जानकारी दी।
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900 बीघा जमीन दान में दी
जाम्बनी मौजा में खुले आसमान तले बेल के पेड़ के नीचे मां काली विराजमान हैं। हर अमावस्या के साथ कार्तिक अमावस्या के दिन भी पूजा करने के लिए यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं। यहां बकरी, भेड़ और भैंस की बलि देने की प्राचीन परंपरा है। अमरनाथ बनर्जी ने कहा कि 400 वर्ष पूर्व बड़ाबाजार तथा बाराभूम राजपरिवार द्वारा माता के नाम पर 900 बीघा जमीन दान में दी गई थी।
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निराकार शिला स्थापित
जमीन देने के बदले में शर्त थी कि माता की पूजा यहीं पर की जाए। उस समय खुले आसमान तले बेल के पेड़ के नीचे पंचमुंड गद्दी पर मां काली की निराकार शिला स्थापित की गई थी। राज परिवार की ओर से आर्थिक सहयोग भी मिलता था। बनर्जी परिवार और देवघरिया परिवार की ओर से पूजा और देखरेख का प्रबंध किया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि कई बार लोगों ने मंदिर बनाने की पहल की लेकिन उन्हें सपने में मां काली की ओर से कहा गया कि वह खुले आसमान के नीचे रहना चाहती हैं। इसलिए आज भी काली पूजा खुले आसमान तले पेड़ के नीचे की जाती है।
Published on:
12 Nov 2023 01:42 pm
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