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कानून बना तो चार शादियों का रिवाज बढ़ा: नाजिया इलाही

तीन तलाक विरोधी कानून बनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वालों में शुमार भाजपा की नाजिया इलाही खान ने मुस्लिम समाज में चार शादियां करने के रिवाज बढऩे पर चिंता जाहिर की। पत्रिका से विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 में तीन तलाक विरोधी कानून बनने के बाद से मुस्लिम पुरुष एक झटके में तीन तलाक देने से डर रहे हैं

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बोली, पुरुष एक झटके में तीन तलाक देने से डर रहे
तीन तलाक विरोधी कानून बनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वालों में शुमार भाजपा की नाजिया इलाही खान ने मुस्लिम समाज में चार शादियां करने के रिवाज बढऩे पर चिंता जाहिर की। पत्रिका से विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 में तीन तलाक विरोधी कानून बनने के बाद से मुस्लिम पुरुष एक झटके में तीन तलाक देने से डर रहे हैं। सजा होने के साथ ही बीबी और बच्चे को खर्च देने के डर से तीन तलाक के मामले में काफी कमी आई है। लेकिन इसके साथ ही मुस्लिम समुदाय में चार-चार शादियां करने के रिवाज में तेजी से इजाफा हुआ है।
नाजिया इलाही खान ने कहा कि मुस्लिम पुरुष चार-चार शादियां कर अपनी पहली पत्नियों को उपेक्षित कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल में चार-चार शादियां करने वालों की संख्या काफी तेजी से बढ़ रही हैं। मुस्लिम महिलाओं के लिए यह बड़ी समस्या बनती जा रही है। यह चिंता का विषय है। मैं इस कुप्रथा को जड़ से समाप्त करना चाहती हूं। चार-चार शादियां करने वाले मुस्लिम पुरुषों की पीडि़त पत्नियों के कल्याण के लिए संगठित तौर पर काम करना चाहती हूं। लेकिन मैं अभी यूसीसी के अभियान में लगी हूं, जो पीडि़त मुस्लिम महिलाओं के लिए हितकारी है।

एनआरसी से रुकेगी बांग्लादेश से घुसपैठ
नाजिया ने कहा कि भारत-बांग्लादेश की सीमा पर सख्त पहरा होने के बाद भी सीमापार से घुसपैठ हो रही है। इस समस्या का स्थाई समाधान एनआरसी है। एनआरसी लागू होना बहुत जरूरी है। भारतीय लोगों को राष्ट्रीय नागरिकता प्रमाण पत्र मिलने के बाद बांग्लादेश से आए घुसपैठियों की पहचान करना आसान हो जाएगा। यह देश और भारतीय नागरिकों के भी हित में है।

पहचान के प्रति जागरूक हुई हैं मुस्लिम महिलाएं
एक सवाल के जवाब में नाजिया ने कहा कि तीन तलाक कानून के अस्तित्व में आने के बाद से मुस्लिम महिलाओं में व्यापक बदलाव आया है। वे जागरूक होने के साथ ही साहसी भी हुई हैं। नई पीढ़ी की मुस्लिम लड़कियां शादी करके सिर्फ चारदीवारी के भीतर नहीं रहना चाहतीं। वे भी अपनी पहचान और करियर बनाना चाहती हैं। इसीलिए केन्द्र सरकार के फैसले का समर्थन कर रही हैं। लेकिन मुस्लिम पुरुषों के हाथ से सबकुछ निकलता जा रहा है, इसलिए वे इस फैसले को स्वीकार नहीं कर पा रहे।