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Indo-Bangla maneuvers: भारत-बांग्लादेश सेना क्यों दे रही है आपसी विश्वास और सांस्कृतिक समझ पर जोर

भारत और बांग्लादेश सेना आपसी सहयोग बढ़ाने के लिए सैन्य अभ्यास कर रही है। इस दौरान दोनों सेनाएं एक दूसरे के प्रति विश्वास प्रगाढ़ करने और दोनों देशों की सांस्कृति को समझने पर क्यों जोर दे रही है।  

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Indo-Bangla maneuvers: भारत-बांग्लादेश सेना क्यों दे रही है आपसी विश्वास और सांस्कृतिक समझ पर जोर

Indo-Bangla maneuvers: भारत-बांग्लादेश सेना क्यों दे रही है आपसी विश्वास और सांस्कृतिक समझ पर जोर

मेघालय में आज से शुरू होगा दोनों देशों का संयुक्त सैन्य अभ्यास

कोलकाता
देश के पूर्वोत्तर राज्य मेघालय में आगामी तीन फरवरी से भारतीय सेना और बांग्लादेश की सेना संयुक्त सैन्य अभ्यास करेंगी। यह दो सप्ताह तक चलेगा। रक्षा मंत्रालय के आधिकारियों ने बताया कि इस दौरान सामरिक स्तर पर एक दूसरे को समझने के अलावा अधिक से अधिक दोनों देशों के सांस्कृतिक समझने- समझाने पर जोर दिया जाएगा। दोनों देशों की सेना ऐसा क्यों कर रही हैं।

एक रक्षा अधिकारी ने बताया कि मेघालय के उमरोई में दोनों देश की सेना संयुक्त सैन्य अभ्यास करेगी। इसका नाम सम्प्रिति-9 रखा गया है और यह सैन्य युद्ध अभ्यास 3 से 16 फरवरी तक चलेगा।
उक्त अधिकारी ने कहा कि यह सैन्य अभ्यास भारत-बांग्लादेश के रक्षा सहयोग का हिस्सा है और यह दोनों देशों के बीच वैकल्पिक रूप से आयोजित संयुक्त प्रयास का नौवां संस्करण होगा। संयुक्त अभ्यास के दौरान, कमांड पोस्ट एक्सरसाइज (सीपीएक्स) और फील्ड ट्रेनिंग एक्सरसाइज (एफटीएक्स) आयोजित की जाएगी।

सीपीएक्स और एफटीएक्स के लिए, एक ऐसा परिदृश्य, जहां दोनों देश संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के तहत आतंकवाद-विरोधी वातावरण में एक साथ काम कर रहे हैं। युद्ध अभ्यास के दौरान विशेष रूप से आतंकवाद विरोधी अभियान का अभ्यास किया जाएगा। दोनों देशों के बीच सैन्य विश्वास और सहयोग को मजबूत करने के लिए अधिक दोनों देशों के सांस्कृतिक समझने- समझाने पर जोर दिया जाएगा।
क्या है एफटीएक्स
एफटीएक्स पाठ्यक्रम प्रगतिशील योजना है, जहां प्रतिभागी एक-दूसरे के संगठनात्मक ढांचे और सामरिक अभ्यास से परिचित होंगे। इसके बाद, एक संयुक्त सामरिक अभ्यास आयोजित किया जाएगा। उस दौरान दोनों देश की सेना युद्ध अभ्यास करेगी। अधिकारी ने बताया कि यह प्रशिक्षण एक अंतिम सत्यापन अभ्यास के साथ समाप्त होगा, जिसमें दोनों सेनाओं की टुकडिय़ां संयुक्त रूप से एक नियंत्रित और कृत्रिम वातावरण में आतंकवाद विरोधी अभियान का अभ्यास करेंगी।